देहरादून , नवंबर 02 -- सोलर ऊर्जा स्वरोजगार की दिशा में एक बेहतर विकल्प है, लेकिन कई निवेशकों को सब्सिडी का भुगतान न होने से उन्हें गम्भीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तराखंड के प्रतापनगर क्षेत्र से विधायक विक्रम सिंह नेगी ने संवाददाता सम्मेलन में उक्त चर्चा की।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्कीम आईडीएस 2017 में शुरू की थी। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कई लोगों ने वर्ष 2020, 2021 और 2022 में इस स्कीम के तहत सौर ऊर्जा प्लांट लगाए। जो 2022 तक मान्य थे। जिसके तहत 30 प्रतिशत सब्सिडी मिलनी थी, लेकिन भारत सरकार ने 2021 में सब्सिडी का पोर्टल बंद कर दिया। इस कारण कई सौर ऊर्जा निवेशक गंभीर आर्थिक संकट में है।
श्री नेगी ने कहा कि सौर ऊर्जा ही एक ऐसा माध्यम है जो पर्वतीय क्षेत्र के बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ सकता है। लेकिन भारत सरकार ने सब्सिडी न देकर, शिक्षित बेरोजगारों के सपनों को चकनाचूर कर दिया। उन्होंने सोलर विकासकर्ताओं की ओर से राज्य सरकार से मांग की कि ऐसी दशा में जब भारत सरकार सब्सिडी नहीं दे रही है, तब राज्य सरकार एमएसएमई योजना के तहत सब्सिडी प्रदान करे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इसे अभी तक स्वीकार नहीं किया है। जिसमें सौर ऊर्जा विकासकर्ता गम्भीर आर्थिक संकट में है। ऐसी स्थिति में भविष्य में पहाड़ में उद्योग चलाना कठिन ही नहीं नामुमकिन है।
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