रामनगर , नवंबर 15 -- उत्तराखंड में विश्वप्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के सबसे चर्चित और पसंदीदा ढिकाला पर्यटन जोन को आखिरकार पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। हर वर्ष की तरह इस बार भी मानसून के बाद शनिवार सुबह ढिकाला गेट में रौनक लौट आयी।
कॉर्बेट प्रशासन के अधिकारियों ने आज सुबह ठीक छह बजे धनगढ़ी गेट पर पर्यटकों का फूल-मालाओं से स्वागत किया और वन अधिकारियों ने पहली सफारी पर रवाना होने वाले पर्यटक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर ढिकाला जोन में प्रवेश कराया।
धनगढ़ी गेट पर पर्यटकों के स्वागत और सफारी की शुरुआत करने के दौरान क्षेत्रीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट, कॉर्बेट पार्क के उप निदेशक, रेंजर और वनकर्मियों की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा प्राथमिकता है और पूरी टीम तैयार है। ढिकाला जोन खुलने के साथ ही स्थानीय लोगों, होटल कारोबारियों, गाइड, जिप्सी मालिकों और कैंटर चालकों में उत्साह की लहर है।
ऐसा माना जा रहा है कि इस पर्यटन सीजन में करीब दो लाख से अधिक पर्यटक कॉर्बेट पार्क का रुख कर सकते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को करोड़ों का फायदा होगा. ढिकाला जोन का खुलना सिर्फ पर्यटकों ही नहीं, बल्कि पूरे रामनगर क्षेत्र के लिए खुशी की खबर है, प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों की भरमार और रोमांचक सफारी को लेकर पर्यटकों में भारी उत्साह है,पहले दिन की शुरुआत बेहद जोशपूर्ण रही और उम्मीद की जा रही है कि यह पर्यटन सीजन कॉर्बेट पार्क के लिए रिकॉर्ड तोड़ साबित होगा।
गौरतलब है कि कॉर्बेट पार्क का ढिकाला जोन हर वर्ष 15 जून को मानसून सीजन के शुरुआत में बंद कर दिया जाता है, क्योंकि इस दौरान जंगल क्षेत्र में नदी-नाले उफान पर रहते हैं और सड़कें टूटने का खतरा बना रहता है लेकिन जैसे ही बरसात समाप्त होती है, तो 15 नवंबर को ढिकाला जोन को फिर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए खोल दिया जाता है।
पर्यटकों का कहना था कि उनका सबसे बड़ा सपना बंगाल टाइगर, हाथियों के विशाल झुंड, हिरण, गुलदार, अन्य प्रजातियाँ, हिरण, घुरल, जंगली सूअर, मगरमच्छ और दुर्लभ पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में देखना है। कुछ पर्यटकों ने कहा कि कॉर्बेट का ढिकाला जोन उन्हें दुनिया के टॉप फॉरेस्ट सफारी स्पॉट्स में से एक लगता है घना जंगल, रामगंगा नदी और वन्यजीवों की विविधता इसे बेहद रोमांचक बनाती है।
ढिकाला जोन की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 31 दिसंबर तक सभी कमरे और नाइट स्टे पूरी तरह बुक हो चुके हैं. वन विभाग के अनुसार, ढिकाला में कुल 41 कमरे उपलब्ध हैं। मुख्य ढिकाला कैंप - 28 कमरे, सुल्तान - दो कमरे, गैरल - छह कमरे, खिनानौली - तीन कमरे, सर्फदुली रेंज - दो कमरे और इसके अलावा 20 बेड की डॉरमेट्री भी उपलब्ध कराई गई है।
जिन पर्यटकों को इस सीजन बुकिंग नहीं मिल सकी है, उन्हें अगले साल जनवरी-मार्च के स्लॉट के लिए फिर से प्रयास करना होगा। ढिकाला जोन में डे सफारी के लिए प्रतिदिन आठ कैंटर संचालित किए जाते हैं। यहां डे सफारी के लिए एक पर्यटक को लगभग 2000 रुपये का परमिट कटता है। पर्यटकों का कहना है कि जंगल में टाइगर साइटिंग का सबसे अधिक मौका ढिकाला जोन में ही मिलता है। ढिकाला में नाइट स्टे में एक कमरे का परमिट लगभग 5000 रुपये में मिलता है लेकिन इसके अलावा कई खर्चे अलग से होते हैं।
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