रांची , अक्टूबर 23 -- चौथी दक्षिण एशियाई एथलेटिक्स फेडरेशन (सैफ) सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप का आधिकारिक एंथम "झारखंड भारथे हुंकार, जोहार जोहार" खिलाड़ियों और झारखंड की जनता के बीच तुरंत ही लोकप्रिय हो गया है।

यह एंथम खेलों की ऊर्जावान भावना को झारखंड की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और पहचान के साथ सहजता से जोड़ता है।

इस एंथम को प्रसिद्ध गीतकार डॉ. मृणालिनी अखौरी ने नगपुरी भाषा में लिखा है, जो झारखंड की स्थानीय भाषा है। इसे झारखंड के लोकप्रिय गायक ज्योति साहू और रोहन देव ने अपनी मधुर और प्रभावशाली आवाज़ में गाया है। दोनों की गूंजती हुई आवाज़ झारखंड की मिट्टी की सादगी और ऊर्जा को जीवंत कर देती है। उनका यह प्रस्तुतीकरण स्टेडियमों और समुदायों में गूंज रहा है, जो खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच एकता और उत्सव की भावना को मजबूत कर रहा है।

यह पूरा एंथम अभियान पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य विभाग, झारखंड सरकार के मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में तैयार किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि एंथम का प्रत्येक तत्व राज्य की संस्कृति, कलात्मक विविधता और खेल भावना को सच्चाई से प्रदर्शित करे। इसे मुंबई और दिल्ली के अनुभवी पेशेवरों की टीम के निर्देशन में तैयार किया है। एंथम में झारखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों - मंदर, बांसुरी और नगाड़ा - का प्रयोग किया गया है। इसकी धुन जहाँ स्थानीय परंपरा में निहित है, वहीं इसका संगीत अंतरराष्ट्रीय अहसास देता है, जो झारखंड के एक आधुनिक खेल केंद्र के रूप में उभरने का प्रतीक है।एंथम का वीडियो संस्करण इस धरोहर और आधुनिकता के संगम को और भी प्रबल रूप से प्रदर्शित करता है।

इसमें झारखंड की विविध कलाओं, जनजातीय परंपराओं, लोक नृत्यों और सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ राज्य के प्रमुख स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों के मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किए गए हैं। वीडियो में खिलाड़ियों की जोशपूर्ण झलकियां शामिल हैं, जो खेल भावना, प्रतिस्पर्धा और झारखंड की जुझारू आत्मा को सशक्त रूप से दर्शाती हैं।

एंथम के बोल झारखंड की तैयारियों और पूरे दक्षिण एशिया से आए खिलाड़ियों के प्रति उसके गर्मजोशी भरे स्वागत को व्यक्त करते हैं।

गीत की सजीव लय और एकता व गौरव का संदेश इसे सार्वभौमिक अपील प्रदान करता है, जिसे गणमान्य व्यक्तियों और नागरिकों द्वारा समान रूप से सराहा जा रहा है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस एंथम की सराहना की है। उन्होंने इसे अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर साझा करते हुए कहा कि यह गीत राज्य की संस्कृति, आतिथ्य भावना और प्रगतिशील सोच का सुंदर प्रतिनिधित्व करता है।

लोकप्रियता का आलम यह है कि यह एंथम भाषा की सीमाओं से परे जा चुका है। प्रैक्टिस सत्रों के दौरान विभिन्न देशों के खिलाड़ी भी इसकी धुन पर झूमते और कदम थिरकाते नजर आए, जिससे यह सिद्ध हुआ कि संगीत और खेल दोनों ही सीमाओं और भाषाओं से परे मानवता को जोड़ते हैं।

अपने जोशीले संदेश और आकर्षक लय के साथ "झारखंड भरथे हुंकार, जोहार जोहार" अब केवल एक एंथम नहीं, बल्कि झारखंड की गौरवशाली संस्कृति, उसकी आत्मा और दक्षिण एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की मेज़बानी के उसके गर्वपूर्ण संकल्प की गूंज बन गया है।

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