जयपुर , नवंबर 13 -- सेना की दक्षिणी कमान ने ट्राई सर्विसेज़ एक्सर्साइज़ त्रिशूल के तहत रेगिस्तानी क्षेत्र में 'अखंड प्रहार एक्सर्साइज़' का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने अभ्यास के दौरान कोणार्क कोर की युद्धक तैयारियों की समीक्षा की। इस अभ्यास ने रुद्र ब्रिगेड द्वारा ज़मीनी अभियानों, विशेष हेलीबोर्न अभियानों और सेना आर्मी एविएसन द्वारा समन्वित हमलावर हेलीकॉप्टर मिशन सहित मशीनीकृत और पैदल सेना युद्धाभ्यासों से लेकर सभी आर्म्स और सर्विसेस के एकीकृत उपयोग के माध्यम से कोणार्क कोर की पूर्ण-स्पेक्ट्रम युद्ध तत्परता को प्रमाणित किया।

इस अभ्यास के दौरान भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना के बीच सहज तालमेल देखा गया और इसमें पैदल सेनाओं के फाइटर ग्राउंड अटैक मिशन भी शामिल थे। यह अभ्यास भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अगली पीढ़ी की स्वदेशी तकनीकों के वास्तविक युद्धक परिस्थितियों में मूल्यांकन का महत्वपूर्ण मंच भी रहा। स्वदेशी ड्रोन, मानवरहित प्रणालियां, ड्रोन-रोधी प्रणालियां और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध ग्रिड का उपयोग, रक्षा में आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करता है।

इस अभ्यास ने कोणार्क कोर के एक आधुनिक, चुस्त और नेटवर्कयुक्त बल में परिवर्तन की पुष्टि की - जो भविष्य के बहु-क्षेत्रीय, उच्च-गति वाले अभियानों के लिए तैयार है।

आर्मी कमांडर ने इस अभ्यास में सभी भाग लेने वाली फॉर्मेशन और यूनिटों की व्यावसायिकता, नवाचार और संयुक्त परिचालन उत्कृष्टता के लिए सराहना की जो दक्षिणी कमान की संयुक्तता, प्रौद्योगिकी अवशोषण और परिचालन उत्कृष्टता के सिद्धांतों का प्रतीक है। अभ्यास'अखंड प्रहार'ने भारतीय सेना की परिचालन उत्कृष्टता, संयुक्त बल एकीकरण और सटीक युद्ध क्षमता के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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