लखनऊ , दिसंबर 30 -- वर्ष 2025 के समापन के साथ उत्तर प्रदेश में नीति आधारित शासन व्यवस्था निवेश और औद्योगिक विकास का मजबूत आधार बनकर उभरी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लागू की गई सेक्टर-विशिष्ट नीतियों ने प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक निवेश मानचित्र पर अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में प्रशासनिक निर्णयों को स्पष्ट नीति ढांचे से जोड़ा। इसी का परिणाम है कि राज्य में 34 से अधिक उद्देश्यपरक और क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक नीतियों का सीधा लक्ष्य निवेश आकर्षण, रोजगार सृजन और औद्योगिक विस्तार रहा।
आईटी/आईटीईएस, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम), रक्षा एवं एयरोस्पेस, इलेक्ट्रिक व्हीकल, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, वस्त्र उद्योग और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों को नीति समर्थन प्रदान किया गया। इन नीतियों के अंतर्गत पूंजी सब्सिडी, 100 प्रतिशत एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, स्टाम्प ड्यूटी व बिजली दरों में छूट जैसे प्रोत्साहन शामिल किए गए।
सरकार ने भारत में पहली बार 'उत्तर प्रदेश एफडीआई/एफआईसी, र्फाच्यून ग्लोबल 500 एवं र्फाच्यून इंडिया 500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023' लागू की। यह नीति वैश्विक निवेश को आकर्षित करने की दिशा में राज्य का बड़ा कदम रही। इसके अंतर्गत फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी, 100 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी व पंजीकरण छूट, बिजली शुल्क में पूर्ण छूट, कौशल विकास और आरएंडडी प्रोत्साहन शामिल हैं।
नीति के तहत पश्चिमांचल एवं मध्यांचल क्षेत्रों में 75 प्रतिशत तक तथा बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों में 80 फीसदी तक लैंड सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इससे औद्योगिक विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिली।
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