टिहरी , फरवरी 10 -- उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में 'सेफर इंटरनेट दिवस' के अवसर पर मंगलवार को नई टिहरी स्थित कीड़ा विभाग सभागार (विकास भवन के समीप) में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की सार्थक उपयोगिता विषय पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य कार्यालय कार्मिकों के साथ-साथ आमजन को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करना और बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति संवेदनशील बनाना रहा।
कार्यशाला में जिला सूचना विज्ञान अधिकारी कुसुम ने एआई तकनीक के सकारात्मक उपयोग के साथ-साथ इसके दुरुपयोग से उत्पन्न खतरों की जानकारी दी। उन्होंने डीपफेक वीडियो, वॉयस क्लोनिंग, चैटबॉट्स, फिशिंग अटैक, डेटा चोरी और सोशल मीडिया से जुड़े जोखिमों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इनसे बचाव के उपाय बताए।
उन्होंने मजबूत पासवर्ड के प्रयोग, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण अपनाने, संदिग्ध लिंक और संदेशों से दूर रहने तथा ओटीपी और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करने की सलाह दी। साथ ही सोशल मीडिया पर कार्ड, दस्तावेज या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने, मोबाइल से अनावश्यक एप हटाने और केवल आधिकारिक एप स्टोर से ही एप डाउनलोड करने पर जोर दिया।
ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम को लेकर उन्होंने फर्जी वेबसाइटों और सोशल मीडिया पर भारी छूट के लालच से बचने तथा जहां संभव हो, कैश ऑन डिलीवरी विकल्प अपनाने की अपील की। इसके अतिरिक्त रिमोट एक्सेस स्कैम से सतर्क रहने, सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट रखने और ऑटो अपडेट सुविधा सक्रिय रखने की सलाह भी दी गई।
पुलिस विभाग से धनराज बिष्ट ने साइबर सुरक्षा पर जानकारी देते हुए 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सोशल मीडिया पर अकाउंट न बनाने की सलाह दी। उन्होंने अनजान व्यक्तियों से संपर्क न करने, फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने, दस्तावेज साझा न करने और ओटीपी किसी को न देने की हिदायत दी।
डिजिटल ठगी की स्थिति में तुरंत पासवर्ड बदलने और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की जानकारी दी गई।
कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से उपस्थितजनों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी टिहरी अवधेश कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी मो. असलम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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