नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक रैलियों और बड़ी सार्वजनिक सभाओं में भगदड़ को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि यह प्रोटोकॉल जिम्मेदारी कार्यपालिका अधिकारियों और विशेषज्ञों के अधिकार क्षेत्रों की हैमुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल पंचोली की पीठ गुरूवार को एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें भारत सरकार और चुनाव आयोग को देशभर में भगदड़ से होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा संहिता एवं मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) बनाने के निर्देश देने की मांग की गयी थी।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि पिछले दो दशकों में भगदड़ की घटनाओं में लगभग 4,000 लोगों की जान चली गई है और इन त्रासदियों का कारण राष्ट्रीय नीति, समान एसओपीए और यहां तक कि 'भगदड़' शब्द की वैधानिक परिभाषा का अभाव है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील जी. प्रियदर्शिनी ने एडवोकेट ऑन रिकार्ड (एओआर) राहुल श्याम भंडारी के साथ मिलकर न्यायालय से न्यूनतम मानदंड तय करने का यह बताते हुए आग्रह किया कि कुछ राज्यों में राजनीतिक रैलियों के दिशा-निर्देश हैं जबकि अन्य में नहीं हैं।
न्यायालय ने पूछा, "क्या हम इस तरह के निर्देश जारी कर सकते हैं? क्या ऐसे निर्देशों का पालन करना संभव है?" और ऐसे आदेशों के खिलाफ चेतावनी दी जो जमीनी स्तर पर 'अव्यवस्थित' साबित हो सकते हैं।
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