चेन्नई , मार्च 12 -- उच्चतम न्यायालय के ओबीसी 'नॉन-क्रीमी लेयर' के निर्धारण पर दिये गये स्पष्ट फैसले का स्वागत करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने गुरुवार को इसे बरसों के संघर्ष के बाद ओबीसी को न्याय दिलाने के लिए एक निर्णायक जीत करार दिया।

उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों का हवाला देते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से उन ओबीसी उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त सीटें सृजित करने का आग्रह किया, जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन उन्हें उनके हक से वंचित कर दिया गया था। उन्होंने संवैधानिक समानता की भावना के साथ इस अन्याय को सुधारने की मांग की।

सोशल मीडिया पर विस्तृत पोस्ट में उन्होंने उच्चतम न्यायालय की उन टिप्पणियों का स्वागत किया, जिनमें कहा गया है कि क्रीमी लेयर के निर्धारण के लिए वेतन से होने वाली आय को व्यवसाय या संपत्ति से होने वाली आय के बराबर नहीं माना जा सकता। यह फैसला असली ओबीसी उम्मीदवारों को गलत तरीके से आरक्षण से बाहर होने से बचाता है।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि सिविल सेवा पात्रता पर उच्च न्यायालय के फैसलों को बरकरार रखने के अलावा उच्चतम न्यायालय ने रोजगार क्षेत्रों में होने वाले भेदभाव को भी खारिज कर दिया है। अदालत ने सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने के आरक्षण के लक्ष्य की पुष्टि की है। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार पर आरक्षण के संवैधानिक आधार से भटकाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एनडीए सरकार ने ऐसे रुख का बचाव किया, जिससे कई असली ओबीसी उम्मीदवार बाहर हो सकते थे और साथ ही ईडब्ल्यूएस कोटा भी लागू कर दिया।

इस बात की ओर इशारा करते हुए कि मंडल आयोग की सिफारिशों के तीन दशक बाद भी प्रमुख संस्थानों और केंद्र सरकार में ओबीसी के कई पद खाली पड़े हैं मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि द्रमुक ने सामाजिक न्याय के लिए निरंतर संघर्ष किया है। उन्होंने चिकित्सा सीटों के 'अखिल भारतीय कोटे' में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण सुरक्षित कराने का उदाहरण देते हुए कहा कि सामाजिक न्याय के लिए द्रमुक की यह मुहिम जारी है।

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