पटना , नवम्बर 01 -- बिहार में 11 नवंबर को दूसरे चरण के 122 सीटों पर होने वाले चुनाव में सुपौल जिले की सभी पांच सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विधायकों को महागठबंधन के प्रत्याशी चुनौती देते नजर आयेंगे।
सुपौल जिले की सभी पांच सीटें सुपौल,छातापुर, त्रिवेणीगंज (सुरक्षित), निर्मली और पिपरा पर राजग का कब्जा है। सुपौल,त्रिवेणीगंज (सुरक्षित), निर्मली और पिपरा में राजग के घटक जनता दल यूनाईटेड (जदयू) और छातापुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कब्जा है।
सुपौल विधानसभा सीट से जदयू के दिग्गज नेता तथा ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव नौवीं बार सत्ता के सिकंदर बनने की ख्वाहिश में है।जदयू उम्मीदवार श्री यादव के विजयपथ रोकने के लिये महागठबंधन के घटक दल कांग्रेस ने मिन्नतुल्लाह रहमानी पर दांव लगाया है। वर्ष 2020 के चुनाव में जदयू के श्री यादव ने कांग्रेस के श्री रहमानी को चुनावी अखाड़े में मात दी थी। इस बार भी इन दोनों प्रत्याशियों के बीच चुनावी संग्राम देखने को मिलेगा।सुपौल विधान सभा इलाका यादव, राजपूत और मुस्लिम बहुल है।इस इलाके में मुस्लिम-यादव (एम वाई) समीकरण से ही उम्मीदवार की हार-जीत तय होती है। इसके अलावा अति पिछड़ा वर्ग की भी अच्छी आबादी है। ब्राह्मण और दलित वोटर की भी तादाद अच्छी-खासी है। सुपौल सीट से नौ प्रत्याशी चुनावी रणभूमि में हुंकार भर रहे हैं।
सुपौल विधानसभा सीट पर तीन दशक से लगातार बिजेंद्र यादव की धाक रही है। वर्ष 1990 में प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन के दौर में पहली बार सुपौल की सियासी सरजमीं पर श्री यादव ने जनता दल के टिकट पर शानदार जीत से सियासी आगाज किया जो बदस्तूर जारी है। इसके बाद वह वर्ष 1995 में भी जनता दल के टिकट पर निर्वाचित हुये। श्री यादव ने वर्ष 2000, फरवरी 2005, अक्टूबर 2005, 2010, 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर हासिल की थी। यह क्षेत्र कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। इस क्षेत्र से सात बार कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है।
सुपौल में कोसी की त्रासदी और विस्थापन आज भी एक बड़ी समस्या के रूप में विद्यमान है। भले ही विकास की लंबी-चौड़ी बातें कर ली जाए, लेकिन कोसी क्षेत्र में बसी एक बड़ी आबादी हर वर्ष कोसी की त्रासदी झेलने को विवश होती है।
भारत-नेपाल सीमा से सटे छातापुर विधानसभा सीट से सियासी पिच पर जीत की हैट्रिक लगा चुके वन एवं पर्यावरण मंत्री और भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिंह बब्लू अब सियासी पिच पर चौका जड़ने के लिये बेताब हैं। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के चचेरे भाई नीरज कुमार सिंह की जीत की राह को रोकने के लिये महागठबंधन के घटक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने विपिन कुमार सिंह पर भरोसा जताया है। वर्ष 2020 के चुनाव में भी जदयू के नीरज कुमार सिंह ने राजद के श्री विपिन कुमार को पराजित किया था। इस क्षेत्र में बाढ़, बेरोजगारी, पिछड़ापन, विकास, शैक्षणिक पिछड़ापन मुख्य चुनावी मुद्दा है। भाजपा के श्री सिंह हर हाल में इस पर अपना कब्जा बरकरार रखने की जुगत में है।वहीं अन्य प्रत्याशी भी लड़ाई को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जी जान से लगे हुए हैं। छातापुर में 13 प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं।
त्रिवेणीगंज (सुरक्षित) जदयू ने विधायक वीणा भारती को बेटिकट कर सोनम रानी सरदार को उम्मीदवार बनाया है। राजद ने यहां संतोष कुमार को उम्मीदवार बनाया है।वर्ष 2020 के चुनाव में पूर्व विधायक विश्वमोहन भारती की पत्नी और तत्कालीन विधायक जदयू उम्मीदवार वीणा भारती ने राजद प्रत्याशी पूर्व सांसद महेन्द्र नारायाण सरदार के पुत्र संतोष कुमार को पराजित किया था। इस सीट से सर्वाधिक सात बार समाजवादी नेता अनूप लाल यादव 1967, 1969, 1972, 1977, 1985, 1990 और वर्ष 2000 में निर्वाचित हुये। पूर्व सासंद विश्वमोहन कुमार भी वर्ष 1995, फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 में इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2015 और वर्ष 2020 में वीणा भारती ने यहां जीत हासिल की है। दिवंगत विश्वमोहन भारती ने छातापुर विधानसभा सीट का 1995 और अक्टुबर 2005 में प्रतिनिधित्व किया है।
निर्मली विधानसभा सीट से जदयू के विधायक अनिरूद्ध प्रसाद यादव सियासी कर्मभूमि पर सिक्सर मारने ले लिये बेकरार हैं। राजद ने यहां वैधनाथ महतो को प्रत्याशी बनाया है। वर्ष 2020 के चुनाव में जदयू उम्मीदवार अनिरूद्ध प्रसाद यादव ने पिपरा विधानसभा के तत्कालीन विधायक यदुवंश कुमार यादव कोमात दी थी।निर्मली विधानसभा क्षेत्र वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया था। यह क्षेत्र पहले किशनपुर विधानसभा क्षेत्र हुआ करता था। इस सीट पर वर्ष 2010 ,वर्ष 2015 और वर्ष 2020 में जदयू के अनिरुद्ध प्रसाद यादव ने जीत हसिल की है। इससे पूर्व जदयू के श्री यादव ने किशनपुर विधानसभा सीट से फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 के चुनाव में भी जीत हासिल की है। वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद किशनपुर सीट विलोपित हो गया है।निर्मली विधानसभा क्षेत्र से आठ प्रत्याशी चुनावी रणभूमि में भाग्य आजमा रहे हैं।
पिपरा सीट से जदयू विधायक राम विलास कामत दूसरी बार चुनावी समर में उतरे हैं। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा माले) ने यहां अनिल कुमार को पार्टी का उम्मीदवार बनाया है। वर्ष 2020 में इस सीट पर जदयू के श्री कामत ने पूर्व सांसद और अपनी ही पार्टी के बागी राजद उम्मीदवार विश्वमोहन कुमार को मात दी थी।पिपरा विधानसभा क्षेत्र वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया थी। वर्ष 2010 के पहले चुनाव में जदयू की सुजाता देवी निर्वाचित हुई।इसके बाद वर्ष 2015 में राजद के यदुवंश कुमार यादव ने भाजपा के विश्वमोहन कुमार को चुनावी अखाड़े में परास्त किया था। पिपरा सीट से 13 प्रत्याशी चुनावी दंगल में ताल ठोक रहे हैं। यह क्षेत्र कोसी नदी में आने वाली बाढ़ से हर साल जूझता है और बहुत से लोग बाढ़ की चपटे में आने से मर जाते है। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्कूल और रोजगार आज भी इस क्षेत्र का प्रमुख चुनावी मुद्दा है।
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