मथुरा , जनवरी 15 -- वृंदावन परिक्रमा मार्ग स्थित सुदामा कुटी आश्रम में चल रहे दस दिवसीय सुदामा कुटी आश्रम के शताब्दी समारोह एवं जगतगुरु स्वामी रामानंदाचार्य जयंती महोत्सव अंतर्गत आयोजित संत प्रवचन में वक्ताओं ने संत सुदामा दास महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

अध्यक्षता करते हुए जगतगुरु राधामोहन शरण देव महाराज ने कहा कि 100 साल पूर्व संत सुदामा दास महाराज ने संत सेवा गौ सेवा एवं पीड़ित मानवता की सेवा का जो संकल्प लिया था वह आज वट वृक्ष के रूप में दिखाई दे रहा है। स्वामी नारायण देवाचार्य महाराज ने कहा कि संत सुदामा दास महाराज ने सारे विश्व में सनातन धर्म को स्थापित करने का कार्य किया। महंत सियाराम दास महाराज एवं राजा रामदास महाराज ने कहा कि व्यक्ति को अपने लिए ना सोचकर समाज के लिए सोचना चाहिए यही भाव रखते हुए संत सुदामा दास महाराज ने सेवा के मार्ग को चुना। इसी मार्ग पर चलते हुए आज महंत सुतीक्ष्ण दास महाराज और अमर दास महाराज इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

स्वामी जगदीश्वर दास महाराज एवं स्वामी बालक देवाचार्य महाराज ने कहा कि पीड़ित मानवता की सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं है। संत सुदामा दास ने पीड़ित मानवता की सेवा को ही ईश्वरीय सेवा माना। नाभा पीठाधीश्वर सुतीक्षण दास ने महोत्सव में देश के विभिन्न से पहुंच रहे सभी संत महात्माओं एवं भक्तों का आभार व्यक्त किया कहा कि संत सुदामा दास महाराज ने सेवा की जो अलख जगाई है उसे इसी तरह आगे बढ़ते रहना हम सब का कर्तव्य है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित