सुकमा , जनवरी 14 -- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में एक बड़ी सफलता मिली है। दरभा डिवीजन के अंतर्गत आने वाले गोगुंडा क्षेत्र की केरलापाल एरिया कमेटी से जुड़े 29 माओवादियों ने बुधवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आत्मसमर्पण किया और शासन की 'पूना मार्गेम' पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
यह आत्मसमर्पण गोगुंडा में हाल ही में स्थापित सुरक्षा कैंप के कारण बने दबाव और निरंतर चल रहे नक्सल विरोधी ऑपरेशनों का सीधा परिणाम है। पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि इससे केरलापाल क्षेत्र अब नक्सल-मुक्त होने के कगार पर है। आत्मसमर्पण करने वाले सभी कैडरों को राज्य सरकार की 'छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025' के तहत लाभ दिया जाएगा, जिसमें प्रति व्यक्ति 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में पोड़ियाम बुधरा (गोगुण्डा पंचायत डीएकेएमएस अध्यक्ष), हेमला मंगड़ू (उपाध्यक्ष), मड़कम हिड़मा (मिलिशिया डिप्टी कमांडर), हेमला हड़मा (मिलिशिया डिप्टी कमांडर), माड़वी देवा (सदस्य), हेमला नंदा (सदस्य), मड़कम बुधरा (पंच कमेटी सदस्य), मुचाकी सोमा (जनताना सरकार सदस्य), मुचाकी गुट्टा (सदस्य), पोड़ियाम देवा (सदस्य), मुचाकी बुधरा (सदस्य), पोड़ियाम सोमड़ा (सदस्य), मुचाकी मूड़ा (सदस्य), सोड़ी देवा (सदस्य), मुचाकी हड़मा (सदस्य), वेट्टी देवा (सदस्य), मुचाकी नंदा (सदस्य), माड़वी राजा (सदस्य), पोड़ियाम बण्डी (सदस्य), सोड़ी नंदा (सदस्य), मड़कम कोसा (सदस्य), सोड़ी बुधरा (सदस्य), मुचाकी आयता (सदस्य), मुचाकी नंदा (सदस्य), मुचाकी मुका (सदस्य), माड़वी सुक्का (सदस्य), माड़वी देवा (सदस्य), मुचाकी हड़मा (सदस्य) और मुचाकी लक्खा (सदस्य) है।
पुलिस प्रमुख ने शेष सक्रिय माओवादियों से भी हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति और विकास की इस पहल में शामिल होने की अपील की है।
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