दमिश्क , दिसंबर 08 -- एक साल पहले बशर-अल असद की सरकार गिरने के बाद सीरिया में लंबे वक्त से चला आ रहा गृह युद्ध तो खत्म हो गया, लेकिन कई सीरियाई परिवार अब भी घर लौटने के इंतज़ार में हैं।

इदलीब और अलेप्पो के शिविरों में सालों गुज़ारने के बाद जब ये परिवार अपने-अपने शहर लौट रहे हैं तो उन्हें अपने घर की जगह सिर्फ मलबे का ढेर मिल रहा है। उनके लिये अपने शहर को पहचान पाना मुश्किल है, इसलिये यह वापसी बेमानी साबित हो रही है।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ की एक रिपोर्ट बताती है कि अलेप्पो की उत्तरी सीमा पर मौजूद ऐन दक़नेह गांव में जो मोहल्ले कभी सैकड़ों लोगों का ठिकाना हुआ करते थे, वे अब टूटी-फूटी दीवारों, खंडहरों और मलबे के ढेर में तब्दील हो गये हैं।

ऐन दक़नेह के रहने वाले 40 वर्षीय यूसुफ़ मोहम्मद दीब तुर्किए की सीमा के करीब मौजूद बाब अल-सलाम शिविर से लौटने के बाद कहते हैं कि जब वह यहां लौटे तो उन्हें तबाही के सिवा कुछ नहीं दिखा। घर से दूर 10 साल बिताने वाले मोहम्मद दीब कहते हैं कि पूरा गांव तहस-नहस हो चुका है और अब वहां कुछ नहीं बचा। रहने के लिये कोई घर नहीं, और युद्ध रुकने के बावजूद भी वह एक शिविर में ही हैं।

संयु्क्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनआरए) के अनुसार, 30 लाख से ज्यादा सीरियाई शरणार्थी युद्ध रुकने के बाद से देश-विदेश से अपने घर लौटे हैं। वापसी के बाद हालांकि उन्हें न तो जीने लायक बुनियादी ढांचा मिला है, न विद्यालय मिले हैं, न स्वास्थ्य सेवाएं मिली हैं और न ही पर्याप्त रोज़गार।

शरणार्थियों के लिये संयुक्त राष्ट्र की उप-उच्चायुक्त केली क्लेमेंट्स के अनुसार, बिजली, पानी, विद्यालय और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे ज़रूरी बुनियादी ढांचे में निवेश के बिना सीरिया लोगों के लौटने के बाद उनकी व्यवस्था नहीं कर पायेगा।

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