नयी दिल्ली , मार्च 10 -- सरकार ने सीमावर्ती देशों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाने के लिए संबंधित दिशा-निर्देशों में बदलाव किये हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इन बदलावों को मंजूरी प्रदान की गयी। इसमें निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मुख्य रूप से दो कदम उठाये गये हैं। पड़ोसी देशों के निवेशक बिना नियंत्रण अधिकार के 10 प्रतिशत लाभ-स्वामित्व तक बिना सरकार की पूर्वानुमति के निवेश कर सकेंगे। इसके अलावा, चुनिंदा महत्वपूर्ण सेक्टरों में निवेश के आवेदन पर 60 दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी कर फैसला लेना अनिवार्य बनाया गया है।

सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि धन शोधन कानून के तहत सीमावर्ती देशों के निवेशकों के लिए लाभ-स्वामित्व की परिभाषा और इसके निर्धारण की अर्हता में बदलाव किया गया है। साथ ही जो निवेशक बिना नियंत्रण के 10 प्रतिशत तक निवेश करना चाहेंगे उन्हें सरकार से पूर्वानुमति की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ जिस कंपनी में निवेश किया जा रहा है उसे इसके बारे में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) को जानकारी देनी होगी।

कोविड-19 के समय अप्रैल 2020 में एफडीआई नीति में बदलाव कर सीमावर्ती देशों से किसी भी तरह के निवेश के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य कर दी गयी थी।

नये नियमों के अनुसार, पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों, पॉलीसिलिकॉन और इनगॉट वेफर जैसे विशिष्ट सेक्टरों/गतिविधियों में निवेश के प्रस्तावों पर 60 दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी कर फैसला लेना होगा।

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