शिमला , दिसंबर 03 -- केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने व्हाट्सएप संदेशों, वीडियो कॉल, ईमेल और फर्जी फोन नंबरों के माध्यम से सीबीआई अधिकारी बनकर साइबर अपराध करने वालों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि के बाद देशव्यापी अलर्ट जारी किया है।

ये संगठित गिरोह मनगढ़ंत आरोपों से लोगों को डरा रहे हैं और अस्तित्वहीन जांचों को निपटाने की आड़ में धन की उगाही कर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, धोखेबाज अब अपनी धमकियों को विश्वासपूर्ण बनाने के लिए एआई-जनित सम्मनों, जाली गिरफ्तारी वारंट, गलत पहचान पत्र, डीपफेक आवाज़ एवं वीडियो जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। सरकारी प्रक्रियाओं से अनभिज्ञ अनेक व्यक्ति इन चालाकीपूर्ण ठगी का शिकार हो रहे हैं और उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।

एक कड़ी चेतावनी जारी करते हुए, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (राज्य साइबर अपराध एवं सतर्कता) श्री नरवीर सिंह राठौर, ने कहा कि इस तरह के छद्म घोटाले हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालने वाले अपराधों में से हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई या कोई भी कानून प्रवर्तन एजेंसी कभी व्हाट्सएप के माध्यम से नोटिस नहीं भेजती, भुगतान की मांग नहीं करती और कॉल द्वारा गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती।

श्री राठौर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश साइबर पुलिस इन धोखाधड़ी के पीछे सक्रिय वीओआईपी आधारित नेटवर्क और फर्जी डिजिटल पहचान पर सक्रिय रूप से नज़र रख रही है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे संदिग्ध कॉलों को तुरंत काट दें, धमकी भरे संदेशों का जवाब देने से बचें तथा ऐसी घटनाओं की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

यह चेतावनी केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राज्य के गृह सचिवों, डीजीपी, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ बुलाई गई राष्ट्रीय बैठक के दौरान विचार-विमर्श के बाद जारी की गई है, जिसमें कई साइबर उत्पीड़न पैटर्न को तत्काल समन्वित कार्रवाई हेतु चिह्नित किया गया।

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