नयी दिल्ली/काजीपेट (तेलंगाना) , जनवरी 14 -- देश की सीमाओं की बर्फीली चोटियों से लेकर शहरों की व्यस्त गलियों तक, हमारे सुरक्षा बल राष्ट्र की ढाल बनकर अनुशासन, साहस और सतत सतर्कता के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं। वही समर्पण और बलिदान की भावना 58वीं सीनियर राष्ट्रीय खो खो चैंपियनशिप में खेल मैदान पर दिखाई दे रही है, जिसका आयोजन तेलंगाना के काज़ीपेट में किया जा रहा है। हमारे अर्धसैनिक और पुलिस बलों से जुड़े पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों के लिए यह प्रतियोगिता मात्र एक खेल नहीं, बल्कि उनके दैनिक कर्तव्य का ही प्रतिबिंब है। हर दौड़, हर डाइव और हर टीम प्रयास उन मूल्यों को दर्शाता है जिन्हें वे अपने जीवन में जीते हैं - समर्पण, एकता, दृढ़ता और राष्ट्र सेवा।
58वीं सीनियर नेशनल खो खो चैंपियनशिप में, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के कर्मियों से बनी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की एक संयुक्त टीम (पुरुष और महिला दोनों श्रेणियों में) ने प्रतिस्पर्धा की, साथ ही अखिल भारतीय पुलिस खेल नियंत्रण बोर्ड (एआईपीएससीबी) की पुरुष और महिलाटीमों ने भी भाग लिया, जिसमें नौ राज्य पुलिस बलों - महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पंजाब के खिलाड़ी शामिल थे।
आईटीबीपी की 26 वर्षीय कांस्टेबल डामोर रीताबेन ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के किबिथू में अपनी उच्च हिमालयी तैनाती के दौरान, जहां का भू-भाग खो खो खेलने के लिए अनुकूल नहीं है, उन्होंने खेल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कभी नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा, "जब मेरी पोस्टिंग हल्द्वानी, उत्तराखंड में हुई तो मैंने फिर से अभ्यास शुरू किया। इसके बाद मुझेअलवर, राजस्थान बुलाया गया, जहां टीम को अंतिम रूप दिया गया। खो खो मेरी रगों में दौड़ने वाला जुनून है।"उनकी सहयोगी और हमउम्र, हरियाणा की रहने वाली 26 वर्षीय आईटीबीपी कांस्टेबल अंजलि देवी ने कहा कि वह स्कूल के दिनों से ही खो खो खेलती आ रही हैं और बल में शामिल होने के बाद उन्होंने इसे और अधिक गंभीरता से अपनाया। अंजलि ने कहा, "मेरा प्रशिक्षण 10 अगस्त 2022 को पूरा हुआ। जब टीम का गठन हो रहा था, तो मैंने अपनी रुचि दिखाई क्योंकि मेरा स्वाभाविक झुकाव हमेशा से इस खेल की ओर रहा है। मैंने 2017 में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में आयोजित सीनियर नेशनल्स में भी भाग लिया है।"महाराष्ट्र पुलिस के 23 वर्षीय कांस्टेबल आदित्य मोहोड, जो अमरावती जिले में तैनात हैं, ने कहा कि खेल उनके परिवार की परंपरा है। उन्होंने कहा, "हम चार भाई हैं और हम सभी खो-खो खेलते हैं। यह मेरी तीसरी सीनियर नेशनल चैंपियनशिप है। मुझे नौकरी खो-खो खेल कोटे के माध्यम से मिली है और मैं खेल के प्रति उतना ही समर्पित हूं जितना अपनी पुलिस ड्यूटीके प्रति।"इसी तरह, तेलंगाना पुलिस के 24 वर्षीय कांस्टेबल सिड्डू नाइक ने बताया कि वह पिछले 12 वर्षों से खो-खो खेल रहे हैं और पांच बार स्कूल गेम्स नेशनल्स में हिस्सा ले चुके हैं। उन्होंने कहा, "सीनियर नेशनल्स में खेलना मेरे लिए गर्व का क्षण है। मैं अपने खेल के माध्यम से तेलंगाना पुलिस, अपने राज्य और अपने देश का नाम रोशन करना चाहता हूं।"खो खो फेडरेशन ऑफ इंडिया(केकेएफआई) के अध्यक्ष सुधांशु मित्तल ने कहा,''खो खो महज एक खेल नहीं है, यह हमारे राष्ट्र के मूल्यों, समर्पण, एकता, दृढ़ता और सेवा का प्रतीक है। हमें गर्व है कि हमारे सुरक्षा बलों के जवान खेल के मैदान पर अपने कौशल काप्रदर्शन कर रहे हैं, जो हमारे राष्ट्र की सेवा करने की भावना को दर्शाता है। यह चैंपियनशिप खेल के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और जुनून का प्रमाण है।''यह चैंपियनशिप लीग-कम-नॉकआउट प्रारूप में खेली जा रही है, जिसके सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले 15 जनवरी को आयोजित किए जाएंगे।
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