सीतापुर , फरवरी 24 -- उत्तर प्रदेश में सीतापुर जिले के नईमीशरण तीर्थ में चल रही 84 कोसी परिक्रमा का दल मंगलवार प्रातः मंदरवा के लिए प्रस्थान कर गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंदरवा में ऋषि मांडव ने वर्षों तक तपस्या की थी तथा पड़ाव क्षेत्र के आसपास अनेक देवी-देवताओं के प्राचीन स्थल स्थित हैं। परिक्रमा दल लगभग चार किलोमीटर की परिधि में ठहरता है। देवगांव पड़ाव पहुंचकर श्रद्धालुओं ने मंगलवार सुबह देवप्रयाग तीर्थ में स्नान किया और शिवालय में भगवान शंकर की आराधना की। परंपरा के अनुसार साधु-संतों एवं कन्याओं को गुड़ एवं कटोरी का दान किया गया। पौराणिक मान्यता है कि महर्षि दधीचि ने परिक्रमा के दौरान इस तीर्थ के जल से आचमन किया था और यहां गुड़ ग्रहण किया था। तभी से यहां गुड़ एवं कटोरी दान की परंपरा प्रचलित है।
देवगांव पड़ाव पर स्थित प्राचीन कुएं की भी परिक्रमा की जाती है। मान्यता है कि देवताओं ने यहां विश्राम किया और इसी कुएं का जल ग्रहण किया था। परिक्रमा दल आज मंदरवा में विश्राम करेगा। चक्र तीर्थ के प्रधान पुजारी ने बताया कि मंदरवा में मांडव ऋषि ने दीर्घकाल तक तपस्या की थी। स्थानीय परंपरा के अनुसार महर्षि दधीचि को यहां लोटा-डोरी दान में दी गई थी, जिसके कारण परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु लोटा एवं डोरी का दान करते हैं।
परिक्रमार्थी मंदरवा में स्थित प्राचीन कुएं एवं मंदिर में मांडव ऋषि की प्रतिमा के दर्शन करते हैं। यहां वाल्मीकि कुएं पर लोटा-डोरी दान की विशेष मान्यता है। इसी क्षेत्र में महर्षि वाल्मीकि का आश्रम भी बताया जाता है, जहां उन्होंने तपस्या की थी। मार्ग में स्थित प्राचीन धार्मिक स्थलों पर परिक्रमार्थी दर्शन कर रात्रि विश्राम करते हैं।
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