हैदराबाद , मार्च 24 -- तेलंगाना की पंचायत राज, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री दानसारी अनसूया सीताक्का ने मंगलवार को राज्य बजट 2026-27 पर सामान्य चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला और सरकार की जनहितैषी पहलों का पुरजोर बचाव किया।

सुश्री सीताक्का ने बहस में भाग लेते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने "बड़े-बड़े दावे" करने के बावजूद पिछले एक दशक में दिव्यांगों और विधवाओं की पेंशन में कोई वृद्धि नहीं की है। उन्होंने यह भी कहा कि विवादास्पद कृषि कानूनों को राहुल गांधी और देशभर के किसानों के निरंतर विरोध प्रदर्शनों के बाद ही वापस लिया गया था।

उन्होंने केंद्र पर बड़े उद्योगपतियों का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनके 16 लाख करोड़ रुपये के ऋण माफ कर दिए गए, जबकि किसानों को ऐसी कोई राहत नहीं दी गई। उन्होंने ब्याज मुक्त ऋण के संबंध में भाजपा के लगाये "निराधार आरोपों" की आलोचना की और कहा कि राज्य सरकार पहले ही 58,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण की सुविधा प्रदान कर चुकी है।

सुश्री सीताक्का ने कहा कि केंद्र से "कोई सहयोग" न मिलने के बावजूद, तेलंगाना सरकार कल्याणकारी योजनाओं पर भारी खर्च कर रही है और वादा की गई 'छह गारंटी' को लागू कर रही है। इनमें मुफ्त बिजली, बारीक श्रेणी के धान के लिए बोनस भुगतान और 4.5 लाख इंदिराम्मा आवासों का निर्माण शामिल है।

तेलंगाना के भाजपा सांसदों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि क्या राज्य के लिए धन सुरक्षित करना उनकी जिम्मेदारी नहीं है? उन्होंने टिप्पणी की, "जनता को खोखले भाषणों से कोई सरोकार नहीं है।" साथ ही उन्होंने काले धन से 15 लाख रुपये जमा करने और ईंधन की सस्ती कीमतों जैसे अधूरे राष्ट्रीय वादों पर भी निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना को केंद्रीय बजट में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला है, पिछले 12 वर्षों में किसी भी परियोजना को राष्ट्रीय दर्जा नहीं दिया गया और 2014 से लंबित बकाये का अभी तक भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने इसे "अन्यायपूर्ण" बताया कि अन्य राज्यों को धन आवंटित किया जा रहा है जबकि तेलंगाना की उपेक्षा की जा रही है। महिला सशक्तिकरण के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की वित्तीय सहायता से महिलाएं 4.7 लाख उद्यम स्थापित करने में सक्षम हुई हैं और सरकार एक करोड़ लखपति महिलाएं बनाने की दिशा में काम कर रही है।

सुश्री सीताक्का ने मनरेगा पर कहा कि केंद्र ने धन आवंटन के स्वरूप को बदल दिया है, जिससे उसका अपना हिस्सा कम हो गया है और राज्यों पर भारी बोझ पड़ गया है। योजना को हालांकि 125 दिनों तक बढ़ा दिया गया है, लेकिन उन्होंने कहा कि केंद्र अब केवल 60 प्रतिशत का योगदान देता है, जो प्रभावी रूप से केवल 75 दिनों की मजदूरी को कवर करता है, जिससे बाकी का बोझ राज्य को उठाना पड़ता है।

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