शिमला , दिसंबर 11 -- हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, (एचपीएनएलयू) शिमला और मानवाधिकार एवं विकलांगता अध्ययन केंद्र (सीएचआरडीएस) ने मानवाधिकार दिवस 2025 पर "मानवाधिकार, हमारी रोज़मर्रा की ज़रूरतें" विषयक पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया ।
कार्यक्रम में कोलंबो विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रो. देशबंधु जीवा निरिएला मुख्य अतिथि थे।
कार्यक्रम में रोज़मर्रा की मानवाधिकार चेतना को मज़बूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया, उभरती वैश्विक मानवाधिकार चुनौतियों के साथ विद्वानों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया और सामाजिक रूप से ज़िम्मेदार नागरिकों को तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।
सत्र में एचपीएनएलयू की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में मानवाधिकारों की अनिवार्य भूमिका और मानवाधिकार साक्षरता को आगे बढ़ाने में शैक्षणिक संस्थानों की ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया।
प्रो. जीवा निरिएला ने अपने संबोधन में तुलनात्मक वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए और युवा विद्वानों से मौलिक स्वतंत्रता की सुरक्षा और प्रचार में सक्रिय रूप से योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में दोनों वक्ताओं ने दैनिक जीवन में मानवाधिकार मूल्यों को शामिल करने और एक मज़बूत मानवाधिकार संस्कृति को बनाए रखने में सामूहिक ज़िम्मेदारी को बढ़ावा देने के महत्व का उल्लेख किया।
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