सुकमा , दिसंबर 04 -- छत्तीसगढ़ में दक्षिण बस्तर के चार जिलों में सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने वहां शिविर लगाकर नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया है।

पुलिस अधीक्षक सुकमा के कार्यालय से गुरुवार को मिली जानकारी के मुताबिक नए शिविर की स्थापना से माओवादियों के दरभा डिवीजन का मजबूत आधार क्षेत्र भी कमजोर पड़ा है। पहाड़ी के चारों दिशाओं से बनाई गई नई सड़क से ग्रामीणों के लिए आवागमन का नया मार्ग तैयार हो गया है, जिसका लाभ उन्हें तुरंत मिलने लगा है। कैंप स्थापना के दौरान खड़ी पहाड़ियों को काटकर सड़क निर्माण करना सुरक्षा बलों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य रहा। सामग्री, संसाधन और सुरक्षा व्यवस्था को पहाड़ी शिखर तक पहुंचाने में जवानों ने कई दिनों तक लगातार जोखिम उठाकर काम किया था।

इसी दौरान आईईडी विस्फोट में एक सीआरपीएफ जवान और एक जिला पुलिस बल की महिला जवान घायल हुए थे, जिनका इलाज जारी है और दोनों की स्थिति सामान्य बताई गई है।

नए कैंप का निरीक्षण 03 दिसंबर को महानिरीक्षक, सीआरपीएफ (छत्तीसगढ़ सेक्टर) शालीन ने किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कैंप की सुरक्षा व्यवस्थाओं, संचार प्रणाली और नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा की और जवानों का मनोबल बढ़ाया। इस दौरान डीआईजी सुकमा रेंज, पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

सुकमा पुलिस अधीक्षक ने कहा कि गोगुंडा में कैंप स्थापना सुरक्षा और विकास को हर गांव तक पहुंचाने के संकल्प का हिस्सा है। जिले में वर्ष 2024 से अब तक 21 नए कैंप स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी बदौलत 587 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, एक साल में 68 नक्सली मारे गए और 450 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है।

उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने 25 मई 2013 को दरभा घाटी के झीरम इलाके एक बड़ा हमला करके तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नन्द कुमार पटेल उनके उच्च शिक्षित बेटे दिनेश पटेल, 9 बार के सांसद विद्याचरण शुक्ला, नेता प्रतिपक्ष और केंद्र में मंत्री और सलवा जुडूम के संस्थापक रहे महेंद्र कर्मा की जान ली थी, इस नक्सल हमले में 27 अधिक लोगों की मौत हुई थी, मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या कांग्रेस के नेताओं की थी। इस हमले नेताओं के साथ ही उनके सुरक्षा गार्ड्स और वाहन चालकों की मौत हुई थी। उसी साल में ही यहां सीआरपीएफ का एक कैंप स्थापित किया गया, अगले वर्ष 2014 में फिर एक सीआरपीएफ कैंप स्थापित किया गया था, फिर साल 2025 में तीन दिसंबर को सीआरपीएफ के 74 वीं बटालियन ने ग्राम गोगुंडा में पहाड़ों की ऊंचाई पर एक कैंप स्थापित किया है।

इस कैंप की स्थापना में डीआरजी, सीआरपीएफ और जिले की पुलिस ने अपना योगदान दिया है, नक्सलियों ने अपनी सुरक्षा और जवानों को नुकसान पहुंचाने की नीयत से इस इलाके में आईईडी प्लांट किया हुआ है। 27 नवम्बर को एरिया डॉमिनेशन के लिए निकली डीआरजी की महिला जवान मुचाकी दुर्गा आईईडी की चपेट में आई थी, राजधानी रायपुर के एक निजी अस्पताल में घायल महिला जवान का ईलाज जारी है।

राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा मुचाकी दुर्गा का हाल जानने अस्पताल गए थे। गोगुंडा की शीर्ष पहाड़ी पर कैंप स्थापना के पहले डीआरजी महिला जवान के आलावा सीआरपीएफ के एक जवान का पैर भी आईईडी पर आया था।

कथित तौर पर झीरम हमले में शामिल चैतु उर्फ श्याम दादा ने नौ साथी नक्सलियों के साथ 28 नवंबर को आत्मसमर्पण किया है। श्याम (डीकेएसजेडसी का सदस्य) दरभा डिविजन कमेटी में सक्रिय था, छत्तीसगढ़ पुलिस ने उस पर 25 लाख रुपए का ईनाम घोषित कर रखा था। श्याम के साथ डिविजनल कमेटी के सदस्य, आठ लाख के ईनामी नक्सली,एरिया कमेटी के छह सदस्य (सभी पर पांच लाख का ईनाम) और दो पार्टी मेंबर (एक एक लाख का ईनाम) के ईनामी नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया है।

सुकमा एसपी ने कहा कि गोगुंडा में कैंप स्थापना सुरक्षा और विकास को हर गांव तक पहुंचाने के संकल्प का हिस्सा है। जिले में वर्ष 2024 से अब तक 21 नए कैंप स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी बदौलत 587 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, इसी साल 68 नक्सली मारे गए और 450 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है।

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