नयी दिल्ली , दिसंबर 22 -- भारत में जीन-संपादन तकनीक के क्षेत्र में बड़ी पहल का रास्ता साफ हो गया है। सीआरआईएसपीआर नवाचार एवं अनुवाद उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-सीआईटी) की स्थापना के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह केंद्र प्रयोगशाला में होने वाले वैज्ञानिक शोध को वास्तविक इलाज और जांच जैसी सुविधाओं में बदलने का काम करेगा।
यह केंद्र अत्याधुनिक सीआरआईएसपीआर तकनीक पर आधारित होगा। सीआरआईएसपीआर एक आधुनिक जीन-एडिटिंग तकनीक है, जिसकी मदद से डीएनए में बहुत सटीक बदलाव किए जा सकते हैं। इससे बीमारियों की पहचान और इलाज के नए और किफायती तरीके विकसित किए जा सकते हैं।
इस केंद्र की स्थापना के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बेंगलुरु स्थित जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) और दिल्ली स्थित जैव प्रौद्योगिकी कंपनी क्रिस्परबिट्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता हुआ है। यह शिक्षा एवं उद्योग के बीच एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक-निजी साझेदारी को दर्शाता है।
सीओई-सीआईटी का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित दवाओं और तकनीकों को सीधे मरीजों तक पहुंचाना है। इसमें जेएनसीएएसआर की बुनियादी जैव-चिकित्सा विज्ञान की विशेषज्ञता और क्रिस्परबिट्स की जीन-एडिटिंग और व्यावहारिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे समाज को सीधे स्वास्थ्य लाभ मिलने की उम्मीद है।
यह उत्कृष्टता केंद्र भारत के जैव प्रौद्योगिकी और नवाचार क्षेत्र को मजबूत करने में मदद करेगा और भविष्य में अकादमिक संस्थानों व उद्योगों के बीच सहयोग का एक उदाहरण बनेगा।
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