नयी दिल्ली , फरवरी 25 -- परियोजनाओं के त्वरित निर्धारण एवं कार्यान्वन के लिए विकसित पीएम गतिशक्ति अवधारणा के तहत नेटवर्क योजना समूह (एनपीजी) की 109वीं बैठक में असम में सिल्चर के डोलू में एक नया हवाई अड्डा स्थापित करने सहित कुल चार परियोजनाओं की समीक्षा की गयी।

इन परियोजनाओं में रेल मंत्रालय की जालंधर कैंट-जम्मू तवी स्टेशन के बीच प्रस्तावित तीसरी रेल लाइन तथा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों में मानिकपुर और इटारसी के बीच तीसरी रेल लाइन की परियोजना है तथा आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत सूरत मेट्रो कॉरिडोर दो के प्रथम चरण के विस्तार की परियोजना शामिल है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अंतर्गत आने वाले पीएम गतिशक्ति के एनपीजी की इस बैठक में जालंधर कैंट-जम्मू तवी स्टेशन के बीच जिस तीसरी प्रस्तावित रेल लाइन की समीक्षा की गयी वह पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 210.750 किलोमीटर तक फैली होगी। प्रस्तावित मार्ग में 27 स्टेशन होंगे और यह जालंधर, होशियारपुर, कांगड़ा, पठानकोट, कठुआ और सांबा जैसे प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी।

इसी तरह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के मानिकपुर और इटारसी के बीच 518.532 किलोमीटर की तीसरी रेल लाइन का प्रस्तावित मार्ग चित्रकूट, सतना, मैहर, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर और नर्मदापुरम जैसे प्रमुख जिलों से होकर गुजरती है, जिससे उत्तरी और मध्य भारत को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण गलियारे पर रेल संपर्क मजबूत होता है।

एनपीजी ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने असम में सिल्चर जिले के डोलू में राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-27 के निकट एक नये हवाई अड्डे के विकास की प्रस्तावित परियोजना की समीक्षा की है।

इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में हवाई यात्रा की बढ़ती मांग को पूरा करना और आधुनिक विमानन अवसंरचना तथा बेहतर क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय संपर्क प्रदान करके मौजूदा नागरिक विमानन सुविधाओं का विस्तार करना है।

गुजरात में सूरत मेट्रो कॉरिडोर दो के प्रथम चरण का सरौली से मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर तक विस्तार के लिए आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय 4.4 किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड कॉरीडोर का प्रस्ताव किया है। इसमें तीन स्टेशन बनेंगे और दो भावी स्टेशनों का भी प्रावधान है। इसका उद्देश्य शहरी परिवहन को बढ़ावा देना और सूरत को क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ना है।

इस परियोजना को मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए एक समर्पित फीडर के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिससे निर्बाध अंतिम-मील कनेक्टिविटी मिलेगी।

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