बिलासपुर , मार्च 26 -- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रायपुर के आमापारा स्थित एक दुकान से जुड़े पारिवारिक विवाद में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल संपत्ति का मालिक होना बेदखली के लिए पर्याप्त नहीं है, बल्कि किरायेदार संबंध के ठोस प्रमाण भी आवश्यक हैं।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता भले ही संपत्ति पर अपना स्वामित्व सिद्ध करने में सफल रही हों लेकिन वह यह साबित नहीं कर सकीं कि प्रतिवादी उनके किरायेदार हैं। ऐसे में बेदखली की मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मामले में यह तथ्य भी सामने आया कि याचिकाकर्ता ने लगभग 15 वर्षों तक न तो किराया मांगा और न ही किरायेदारी संबंधी कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत किया। इससे उनके दावे पर संदेह उत्पन्न हुआ।
पूर्व में रेंट कंट्रोल अथॉरिटी और ट्रिब्यूनल द्वारा भी इसी आधार पर आवेदन खारिज किया जा चुका था, जिसे उच्च न्यायालय ने सही ठहराया। अदालत ने कहा कि केवल सेल डीड के आधार पर किरायेदारी संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने यह भी माना कि विवाद मूलतः पारिवारिक संपत्ति से जुड़ा है, जिसका अंतिम निर्णय सिविल कोर्ट में लंबित टाइटल सूट के आधार पर होगा। ऐसे में रिट याचिका में हस्तक्षेप उचित नहीं है।
अंततः उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए पक्षकारों को सिविल न्यायालय में लंबित अपील में अपना पक्ष रखने की स्वतंत्रता प्रदान की है।
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