नयी दिल्ली , अक्टूबर 31 -- नीति आयोग में कार्यक्रम निदेशक अन्ना रॉय ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय शहरों को ''जीने लायक बनाने'' के लिए शहरों के साथ आसपास के इलाकों को भी विकसित करने की जरूरत है।

श्रीमती रॉय ने यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा रियल एस्टेट पर आयोजित एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कोई भारतीय सिंगापुर में जाकर काम क्यों करना चाहेगा जबकि बेंगलुरु जैसे उभरते शहरों में भी उसे करियर के लिहाज से अच्छा अवसर मिल सकता है। उन्होंने कहा कि किसी शहर में रहने के लिए कैसी सुविधाएं हैं और आसपास कैसा माहौल है यह भी मायने रखता है। उन्होंने कहा कि शहरों को विकसित करते समय यह जरूर ध्यान दिया जाना चाहिये कि वे जीने लायक हों।

शहरों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने और जीने लायक बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के शीर्ष 100 शहरों में एक भी भारतीय शहर न होने का यही कारण है। सिर्फ शहरों की प्रशासनिक सीमा तक ही नहीं आसपास के इलाकों को भी उसी तरह से तैयार किये जाने की जरूरत है।

इस मौके पर देश में वाणिज्यिक रियल एस्टेट की स्थित पर एक रिपोर्ट भी जारी की गयी। इसमें कहा गया है कि आधुनिक शॉपिंग सेंटर संगठित रिटेल में सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं और इसमें एयरपोर्ट रिटेल हाई-वैल्यू वाले उपवर्ग के रूप में उभरा है। मझौले और छोटे शहरों का उभरना एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

रिपोर्ट के अनुसार, रियल एस्टेट में सबसे नया उभरने वाला वर्ग डाटा सेंटर तेजी से बढ़ रहा है। तेजी से बढ़ते 5जी नेटवर्क, एआई, क्लाउड कंप्यूटिगं और डाटा को देश में ही स्टोर करने के आदेश के कारण भारतीय डाटा सेंटर बाजार 10 गीगावाट को पार कर चुका है जिसमें 1.4 गीगावाट सक्रिय हो चुका है।

सीआईआई और नाइट फ्रैंकफर्ट इंडिया द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2000 से 2025 तक देश में ऑफिस स्पेस में 8.6 प्रतिशत सालाना की औसत दर से वृद्धि हुई है। सबसे तेज विकास बेंगलुरु, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में देखा गया है। कुल ऑफिस स्पेस का 60 प्रतिशत इन्हीं तीन इलाकों में है।

रिटेल वर्ग में 325 लाख वर्ग फुट के साथ एनसीआर पहले और 164 लाख वर्ग फुट के साथ मुंबई दूसरे स्थान पर है। हालांकि अब मझौले शहरों में भी तेज विकास देखा जा रहा है और उनका कुल रिटेल स्पेस 360 लाख वर्ग फुट है। इस विकास में लखनऊ, इंदौर और कोच्चि सबसे आगे हैं।

डाटा सेंटर के मामले में कुल 4,008 मेगावाट के साथ मुंबई पहले स्थान पर है जिसमें 591 मेगावाट सक्रिय है। हैदराबाद 2,117 मेगाटव (161 मेगावाट सक्रिय) के साथ दूसरे और 1,606 मेगावाट के साथ चेन्नई तीसरे स्थान पर है जिसमें 177 मेगावाट सक्रिय है।

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