झाबुआ , मार्च 12 -- मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए स्वास्थ्य जागरूकता और आधुनिक कृषि पद्धतियों को साथ लेकर आगे बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने सिकल सेल एनीमिया जैसी आनुवांशिक बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और किसानों को आधुनिक कृषि संसाधनों से जोड़ने पर जोर दिया।
राज्यपाल झाबुआ में अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया जागरूकता कार्यक्रम तथा कृषि उपकरण और बीज वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर किसानों को कृषि उपकरण और बीज वितरित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समुदाय में सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समय पर परीक्षण तथा उपचार के लिए प्रेरित करना था।
उन्होंने बताया कि सिकल सेल एनीमिया एक आनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कणिकाएं हंसिया के आकार की हो जाती हैं और जल्दी टूटने लगती हैं। इससे मरीज को गंभीर एनीमिया, पीलिया और तिल्ली बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार यह बीमारी शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द, लकवा या हृदयाघात जैसी गंभीर स्थितियां भी उत्पन्न कर सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 21 नवंबर 2021 को राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की शुरुआत की गई थी। इसके पहले चरण में झाबुआ और अलीराजपुर जिलों में पायलट परियोजना लागू की गई। झाबुआ जिले में अब तक शून्य से 40 वर्ष आयु वर्ग के आठ लाख 57 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें 16 हजार 667 बाहक और 1787 मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक एक करोड़ 30 लाख से अधिक जांचें की जा चुकी हैं और एक करोड़ से अधिक डिजिटल कार्ड वितरित किए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान झाबुआ और अलीराजपुर जिले के 300 से अधिक आदिवासी किसानों को लगभग 36 लाख रुपये लागत के कृषि उपकरण और बीज वितरित किए गए। इसके अलावा 250 किसानों को फावड़ा, छाता, बाल्टी, टॉर्च, त्रिपाल, डिब्बलर मशीन, वर्मी बेड और सब्जी किट जैसी सामग्री प्रदान की गई।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया और सांसद अनीता नागर सिंह चौहान ने भी जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में राज्यपाल ने सिकल सेल से पीड़ित मरीजों से बातचीत कर उनका हालचाल भी जाना।
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