उज्जैन , मार्च 17 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ-2028 सनातन संस्कृति का विश्वस्तरीय समागम होगा और इसमें आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु राज्य सरकार का अतिथि होगा।
डॉ. यादव मंगलवार को उज्जैन में गीता भवन सहित विभिन्न विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस महापर्व को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 का आयोजन "भूतो न भविष्यति" होगा और इसके लिए केंद्र तथा राज्य सरकार मिलकर कार्य कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 3 हजार 839 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-752डी के बदनावर-पेटलावद-थांदला खंड को फोर लेन करने की स्वीकृति दी गई है। इससे उज्जैन का संपर्क दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से बेहतर होगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत राज्य सरकार ने 13 हजार 851 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों को स्वीकृति दी है। इसके अलावा वर्ष 2026-27 के लिए 3 हजार 60 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है, जो उज्जैन के समग्र विकास का रोडमैप साबित होगा।
उन्होंने कहा कि उज्जैन को आधुनिक सुविधाओं से युक्त, स्वच्छ और व्यवस्थित आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि यह विश्व स्तर पर एक आदर्श मॉडल बन सके।
डॉ. यादव ने बताया कि चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा और हिंदू नववर्ष के अवसर पर उज्जैन को विकास कार्यों की सौगात दी जा रही है। उन्होंने कहा कि 662 करोड़ 46 लाख रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 77 करोड़ 14 लाख रुपये की लागत से गीता भवन का निर्माण तथा 30 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से विक्रम नगर रेलवे ओवरब्रिज का भूमिपूजन शामिल है। इसके साथ ही 11 सड़क निर्माण कार्यों की भी आधारशिला रखी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसान कल्याण वर्ष-2026 के तहत किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है। पशुपालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और पिछले लगभग डेढ़ वर्ष में दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन सभी प्रयासों से सिंहस्थ-2028 न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि विकास, व्यवस्था और प्रबंधन का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
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