नई दिल्ली , दिसंबर 15 -- मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में खनन परियोजनाओं के नाम पर पर्यावरण, वन कानूनों और आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सिंगरौली में संविधान, पर्यावरण और आदिवासी समाज के अधिकारों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और पार्टी इस मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन और अदालत तक संघर्ष करेगी।
इस मुद्दे की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा गठित तथ्य अन्वेषण समिति ने आज कांग्रेस मुख्यालय, नई दिल्ली में पीड़ित आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ प्रेस वार्ता की। प्रेस वार्ता में पर्यावरणीय क्षति, वन कानूनों के उल्लंघन और आदिवासी जमीनों के कथित अवैध हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, तेलंगाना प्रभारी एवं पूर्व सांसद सुश्री मीनाक्षी नटराजन, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कमलेश्वर पटेल, केंद्रीय चुनाव समिति सदस्य ओंकार मरकाम, पूर्व मंत्री बाला बच्चन, राष्ट्रीय सचिव सुश्री हिना कांवरे तथा मध्यप्रदेश के सह-प्रभारी रणविजय लोचव उपस्थित रहे।
मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि सिंगरौली में संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण, वन्यजीव और आदिवासियों से जुड़े सभी नियम-कानूनों को ताक पर रख दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर आंदोलन करेगी और इसे सदन के साथ-साथ अदालत तक ले जाया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी निवास करती है और यहां 1.5 करोड़ से अधिक आदिवासी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून के बावजूद, जिसमें आदिवासी भूमि गैर-आदिवासियों को नहीं बेची जा सकती, राज्य में 1 लाख 46 हजार हेक्टेयर भूमि खनन के लिए दी गई है। उन्होंने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में सरकार ने 1 लाख 30 हजार हेक्टेयर आदिवासी भूमि बेच दी है और नियमों को दरकिनार कर 5 हजार से अधिक खदानें आवंटित की गई हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि क्या केंद्र सरकार देश का पर्यावरण बर्बाद करना चाहती है और क्या आदिवासियों को उनके घर, जमीन और जंगल से बेदखल करना चाहती है। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री "एक पेड़ मां के नाम" की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर कॉरपोरेट हितों के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई की अनुमति दी जा रही है।
कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया कि सिंगरौली का यह मामला केवल एक जिले या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संविधान, पर्यावरण संरक्षण, आदिवासी अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है। पार्टी ने कहा कि आदिवासी समाज, पर्यावरण और देश के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
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