नयी दिल्ली , जनवरी 06 -- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि हम भारत की साहित्यिक विरासत को लोकप्रिय बनाने और संरक्षित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
श्री प्रधान ने मंगलवार को यहां शास्त्रीय भाषाओं- कन्नड़, तेलुगु, मलयालम और ओडिया के उत्कृष्टता केंद्रों द्वारा विकसित 41 साहित्यिक कृतियों का विमोचन करने के बाद कहा, "हम भारत की साहित्यिक विरासत को लोकप्रिय बनाने और संरक्षित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारतीय भाषाएं अभिव्यक्ति का माध्यम हैं और सरकार इन भाषाओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। बजट की कोई कमी नहीं है और एक ढांचा विकसित किया जा रहा है।"उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषा आधारित शिक्षा की परिकल्पणा की गयी है। भारत में शिक्षा बहुत पुरानी परंपरा है। यह साहित्य एक शब्द से सीमित होने वाला नहीं था। भारतीय भाषा मनुष्य के लिए सबसे पहला वैज्ञानिक उपलब्धि है। सभी भारतीय बहुभाषी है। अंग्रेजों ने बांटो और राज करो की मैकाले योजना के तहत भारत में भाषा को बाधक बनाया लेकिन हमारी सभ्यता बताती है कि भाषा जोड़ने वाली रही है। भाषा कभी विभाजन करने वाला नहीं है। भारत में चार कोसों में पानी का स्वाद बदल जाता है और एक एक कोस में भाषा का प्रारुप बदल जाता है। सभी भाषा की अपनी कोमलता और मधुरता है। एक ही शब्द का अनेक भावार्थ निकलता है। उच्चारण से भावार्थ बदल जाता है।
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