कोलकाता , जनवरी 29 -- पश्चिम बंगाल के कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार अलीपुर बॉडीगार्ड लाइंस में एक विदाई परेड को संबोधित करते हुए पुलिसकर्मियों को साहस, दृढ़ संकल्प और कर्तव्य पर एक कड़ा संदेश दिया।
श्री कुमार हाल के दिनों में राज्य पुलिस के सबसे चर्चित और विवादित चेहरों में से एक रहे हैं और 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। फिलहाल कार्यवाहक या अस्थायी डीजीपी के रूप में कार्यरत श्री कुमार ने राज्य और कोलकाता पुलिस की पेशेवर और प्रतिबद्धता के लिए तारीफ की और कर्मियों से मुश्किल हालात में भी अडिग रहने का आग्रह किया। पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों को संबोधित करते हुए, उन्होंने उन मुख्य मूल्यों पर जोर दिया, जो उनके अनुसार पुलिस बल को परिभाषित करते हैं और उससे जनता की उम्मीदों को आकार देते हैं।
श्री कुमार ने अपने संबोधन में कहा, "पुलिस बल का पहला गुण साहस है। अक्सर, हमें बहुत मुश्किल हालात और गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अगर हम ऐसे पलों में सच्चा साहस दिखा सकते हैं, तो हम किसी भी चुनौती से पार पा सकते हैं।" साहस की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा, "साहस का मतलब है अपनी जगह पर डटे रहना और अपने फैसलों पर अडिग रहना।" पश्चिम बंगाल पुलिस के सामने आने वाली भौगोलिक और रणनीतिक चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "राज्य तीन देशों नेपाल, भूटान और बंगलादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जिससे यह क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो जाता है।"उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल सबसे रणनीतिक और भू-राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य है। भारत में कोई दूसरा राज्य ऐसा नहीं है जिसकी सीमाएं तीन देशों से लगती हों। पड़ोसी देशों या यहां तक कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में जो कुछ भी होता है, उसका सीधा असर पश्चिम बंगाल पर पड़ता है।"श्री कुमार ने कहा कि राज्य और कोलकाता पुलिस ने लगातार बेहतरीन तरीके से अपने कर्तव्यों का पालन किया है। चाहे वह कानून-व्यवस्था बनाए रखना हो या व्यापक सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करना हो, पश्चिम बंगाल में पुलिस बल हमेशा सबसे अलग रहा है। उन्होंने कहा, "बातें करना उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना काम करना। आप देश के सबसे अच्छे पुलिस बलों में से एक हैं। लेकिन इसे बातों से नहीं, बल्कि कार्रवाई से बनाए रखना होगा।"अतीत में माओवादी चुनौती से निपटने के तरीके का जिक्र करते हुए श्री कुमार ने पुलिस की संचालन प्रभावशीलता के लिए उनकी तारीफ की। उन्होंने दुर्गा पूजा और गंगासागर मेला जैसे बड़े आयोजनों और त्योहारों के प्रबंधन पर भी प्रकाश डाला, और कहा कि जिस तरह से पुलिस इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करती है और ऐसे बड़े आयोजनों के दौरान व्यवस्था बनाए रखती है, वह गर्व की बात है। उन्होंने कहा, "कई जगहों पर, ऐसे आयोजनों में जानमाल का नुकसान हुआ है। लेकिन जिस तरह से हमारी पुलिस इन त्योहारों का प्रबंधन करती है और कानून-व्यवस्था बनाए रखती है, वह हमें गर्व महसूस कराता है।"श्री कुमार ने पुलिस प्रणाली के सभी पदों के योगदान को भी स्वीकार किया, और इस बात पर जोर दिया कि केवल वरिष्ठ अधिकारी ही बल की उपलब्धियों का श्रेय नहीं ले सकते। उन्होंने कहा, "जिस तरह वरिष्ठ अधिकारी योगदान देते हैं, उसी तरह होम गार्ड और नागरिक स्वयंसेवक भी योगदान देते हैं। हम एक परिवार हैं, और हमारी ताकत एकजुट रहने में है।"श्री कुमार की विदाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम बंगाल में फिलहाल कोई पूर्णकालिक डीजीपी नहीं है, श्री कुमार कार्यवाहक क्षमता में काम कर रहे हैं। हालांकि उन्हें 31 जनवरी को सेवानिवृत होना है, लेकिन उनका नाम राज्य सरकार द्वारा केंद्र को डीजीपी पद के लिए विचार करने के लिए भेजे गए अधिकारियों की सूची में शामिल किया गया है। नियमों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग राज्य सरकार द्वारा भेजे गए नामों में से तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का एक पैनल तैयार करता है, जिसमें से राज्य एक को डीजीपी के रूप में नियुक्त करने के लिए चुनता है। श्री कुमार के अलावा, राज्य द्वारा भेजी गई सूची में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी राजेश, रणबीर कुमार, देबाशीष रे, अनुज शर्मा, जगमोहन, एन रमेश बाबू और सिद्धीनाथ गुप्ता शामिल हैं। पश्चिम बंगाल के आखिरी स्थायी डीजीपी मनोज मालवीय थे, जो दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे।
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