जालौन , जनवरी 3 -- उत्तर प्रदेश के जालौन में शनिवार को समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें वक्ताओं ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन, महिला शिक्षा और सामाजिक समानता के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला।

उरई मे पटेल नगर स्थित विवेक कुमार सैनी के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में महात्मा ज्योतिबा फुले-माता सावित्रीबाई फुले संघर्ष मोर्चा उरई जालौन के जिला अध्यक्ष जगदीश सैनी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों के लिए असाधारण संघर्ष किया।

उन्होंने बताया कि सावित्रीबाई फुले (3 जनवरी 1831-10 मार्च 1897) देश की पहली महिला शिक्षिका, समाजसुधारक, कवयित्री और नारीवादी चिंतक थीं, जिन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त हथियार बनाया।

जगदीश सैनी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने 1848 में पुणे में बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय खोलकर सामाजिक क्रांति की नींव रखी। अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर उन्होंने 18 से अधिक विद्यालयों की स्थापना की और विधवाओं व शोषित वर्ग की महिलाओं की शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उनका संपूर्ण जीवन मानवीय गरिमा, समानता और न्याय के लिए समर्पित रहा, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।

इसी कड़ी में ग्राम गढ़र (उरई-कोंच रोड) में माता सावित्रीबाई फुले जयंती एवं स्मृतिशेष राजेंद्र निरंजन के प्रथम स्मृति दिवस के अवसर पर एक भव्य सम्मेलन एवं प्रतिमा अनावरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फुले, महिला शिक्षा की जनक माता सावित्रीबाई फुले, स्मृतिशेष राजेंद्र निरंजन एवं स्मृतिशेष सरला निरंजन की प्रतिमाओं का विधिवत अनावरण किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आज़ाद रहे। विशिष्ट अतिथियों में सांसद रामशिरोमणि वर्मा, लोकपाल आर. आर. जैसवार, अपर पुलिस महानिदेशक अनिल किशोर यादव, आईएएस धीरेंद्र सचान, राष्ट्रीय ओबीसी आयोग के सदस्य कौशलेन्द्र सिंह पटेल, सामाजिक चिंतक लक्ष्मण यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी, माधौगढ़ विधायक मूलचंद्र निरंजन, पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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