बेंगलुरु , फरवरी 09 -- कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने सोमवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सावरकर की भूमिका से जुड़े सवालोंं का जनता को जवाब देना चाहिये।
श्री खरगे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान किसी को भी देने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता। उन्होंने वी.डी. सावरकर द्वारा ब्रिटिश हुकूमत को कथित दया याचिकाएं भेजने, ब्रिटिश पेंशन स्वीकार करने और डॉ. बी.आर. आंबेडकर का विरोध करने से जुड़े मुद्दे उठाए।
उन्होंने कहा, "बाबासाहेब आंबेडकर ने स्वयं इस बारे में लिखा है। पहले इन सवालों का जवाब दें, फिर यदि सच में उन्हें योग्य मानते हैं तो भारत रत्न दे दें।"श्री खरगे ने भाजपा सांसदों पर " पूर्व निर्धारित नौटंकी " करने और विकास, संघीय ढांचे तथा संसदीय कार्यप्रणाली के मुद्दों पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज को जानबूझकर दबाया जा रहा है।
मेट्रो रेल किराए के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किराया निर्धारण समिति, जो केंद्रीय कानून के तहत गठित है और केंद्र के अधीन है, वही किराया वृद्धि का निर्णय लेती है, लेकिन इसका दोष राज्य सरकार पर डाला जा रहा है। उन्होंने कहा, "मेट्रो की एक इंच लाइन बिछती है तो श्रेय मोदी जी को जाता है, लेकिन यदि एक रुपये का किराया बढ़ता है तो बदनामी राज्य सरकार को मिलती है।" उन्होंने आरोप लगाया कि प्रक्रिया पर नियंत्रण होने के बावजूद केंद्र ने किराया वृद्धि को रोका है।
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