पुणे , मई 02 -- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि के मामले की सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ता सात्यकी सावरकर ने हाल ही में यहां विशेष सांसद/विधायक अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर का नाम महात्मा गांधी की हत्या के मामले में बतौर आरोपी दर्ज था, लेकिन बाद में उन्हें बरी कर दिया गया था।
यह सुनवाई विशेष न्यायाधीश अमोल श्रीराम शिंदे की अदालत में चल रही है। जिरह के दौरान श्री राहुल गांधी की तरफ से वकील मिलिंद दत्तात्रय पवार ने श्री सात्यकी सावरकर से सावरकर से जुड़े कई ऐतिहासिक और वैचारिक मुद्दों पर सवाल पूछे।
राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार की ओर से आज जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सात्यकी सावरकर ने यह भी स्वीकार किया कि विनायक दामोदर सावरकर ने अपनी जेल यात्रा के दौरान ब्रिटिश सरकार को पांच बार दया याचिकाएं सौंपी थीं। सावरकर के हिंदुत्व संबंधी विचारों, द्वि-राष्ट्र सिद्धांत और गाय को देवता नहीं, बल्कि केवल उपयोगी पशु बताने वाली उनकी विवादास्पद टिप्पणियों के बारे में भी सवाल उठाये गये।
बचाव पक्ष ने वरिष्ठ पत्रकार निरंजन टाकले की ओर से की गयी आलोचनाओं का भी उल्लेख किया, जिसमें 'गांधी विश्वास हैं, जबकि सावरकर अंधविश्वास' जैसे बयान और सावरकर की विरासत पर सवाल उठाने वाले संदर्भ शामिल थे। वरिष्ठ पत्रकार सुरेश द्वादशीवार की उन टिप्पणियों का भी जिक्र किया गया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि सावरकर ने औपनिवेशिक शासन के दौरान अंग्रेजों के लिए सैन्य भर्ती को प्रोत्साहित किया था।
अधिवक्ता पवार ने कहा कि सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्हें प्रकाश अंबेडकर की सावरकर की भूमिका की तुलना वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व से करने वाली कथित टिप्पणियों की जानकारी नहीं है। साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी की एक पुस्तक के उन संदर्भों के बारे में भी उन्हें पता नहीं था, जिनमें दावा किया गया था कि सावरकर ने स्वतंत्रता के बाद के काल में सरदार वल्लभभाई पटेल के खिलाफ भड़काऊ रुख अपनाया था।
अधिवक्ता पवार के अनुसार, सात्यकी सावरकर ने यह भी स्वीकार किया कि सावरकर पर इसी तरह की टिप्पणी करने के मामले में श्री राहुल गांधी के अलावा किसी और के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की गयी है।
शिकायतकर्ता ने आगे कहा कि सावरकर परिवार के सदस्यों ने व्यक्तिगत रूप से कभी भी सावरकर के लिए भारत रत्न की मांग नहीं की है, हालांकि कुछ वैचारिक संगठनों ने ऐसी मांग उठायी होगी।
अधिवक्ता पवार ने बताया कि कार्यवाही के दौरान सात्यकी सावरकर ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भगत सिंह, अशफाकुल्ला खान, उधम सिंह और बटुकेश्वर दत्त जैसे क्रांतिकारियों के योगदान को स्वीकार किया। सात्यकी सावरकर ने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीक के रूप में संसद में सावरकर का चित्र लगाया गया है, हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि कुछ अन्य क्रांतिकारियों को इसी तरह की मान्यता क्यों नहीं दी गयी। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को तय की गयी है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित