बालोद, 15 फरवरी 2026 ( वार्ता ) छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में सेन समाज ने विवाह समारोहों में प्रचलित 'जूता छुपाने' की परंपरा को समाप्त करने की घोषणा की है और कहा है कि किसी भी पुत्र या पुत्री के विवाह में विधवा माता को 'मौर' सौंपने सहित सगाई और विवाह की सभी प्रमुख रस्मों में सम्मानपूर्वक सहभागी बनाया जाएगा।
सेन समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को बंजारी धाम, जुंगेरा में आयोजित की गई, जिसमें जिले के सभी प्रखंड इकाइयों और महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारी, समाज के वरिष्ठजन, महिला प्रतिनिधि तथा युवा वर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य समाज में एकता, अनुशासन और सामाजिक उत्थान को और अधिक सुदृढ़ करना रहा।
बैठक में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए विवाह समारोहों में प्रचलित 'जूता छुपाने' की परंपरा को समाप्त करने की घोषणा की गई। साथ ही यह भी तय किया गया कि किसी भी पुत्र या पुत्री के विवाह में विधवा माता को 'मौर' सौंपने सहित सगाई और विवाह की सभी प्रमुख रस्मों में सम्मानपूर्वक सहभागी बनाया जाएगा। समाज के इस निर्णय को महिलाओं के सम्मान और समान सहभागिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सगाई के बाद विवाह से पूर्व लड़का-लड़की के बीच मोबाइल पर निजी बातचीत को पूर्णतः प्रतिबंधित करने का भी निर्णय लिया गया। आवश्यक संवाद माता-पिता या अभिभावकों की उपस्थिति में ही होगा। समाज के किसी भी सदस्य द्वारा धर्म परिवर्तन किए जाने की स्थिति में सामाजिक स्तर पर कठोर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी।
रोजगार संबंधी विषय पर भी अहम निर्णय लिए गए। तय किया गया कि सेन समाज के सदस्य अन्य समाज या धर्म के सैलून, ब्यूटी पार्लर अथवा समान प्रतिष्ठानों में कार्य नहीं करेंगे। उल्लंघन की स्थिति में समाज की अनुशासन समिति कार्रवाई करेगी। साथ ही प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक सैलून संघ का गठन किया जाएगा, जो जिला संगठन के नियमों के तहत संचालित होगा।
सामाजिक कुरीतियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से मृत्यु भोज पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। केवल सादगीपूर्ण भोजन दाल, भात और सब्जी रखने की अनुमति होगी। कलेवा कार्यक्रम में भी फिजूलखर्ची पर नियंत्रण की बात कही गई। किसी परिवार में मृत्यु होने पर कफन ओढ़ाने की परंपरा के स्थान पर समाज के सदस्य नकद राशि देकर सहयोग करेंगे।
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