सांची , जनवरी 23 -- सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में वसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजन का आयोजन किया गया। इसी के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई।
भारतीय चित्रकला विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अधिष्ठाता प्रो. नवीन कुमार मेहता ने विधिवत सरस्वती पूजन संपन्न कराया। इस अवसर पर भारतीय दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन दीक्षित ने सरस्वती पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा में परा एवं अपरा विद्या की अवधारणा को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि वैदिक काल से ही सरस्वती उपासना के प्रमाण मिलते हैं, इसी कारण इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा गया।
डॉ. दीक्षित ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आध्यात्मिक जीवन पर भी प्रकाश डाला और बताया कि बचपन से ही स्वामी विवेकानंद उनके आदर्श थे। स्वामी विवेकानंद और स्वामी अरबिंदो के विचारों से नेताजी अत्यंत प्रभावित थे और वे रामकृष्ण मिशन एवं अरबिंदो आश्रम से जुड़े रहे।
प्रो. नवीन कुमार मेहता ने अपने वक्तव्य में बताया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने चयन होने के बावजूद आईसीएस की नौकरी को ठुकरा दिया था, क्योंकि वे अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार नहीं करना चाहते थे। बाद में उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध आजाद हिंद फौज का गठन कर स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वैद्यनाथ लाभ एवं कुलसचिव प्रो. आर.एन. गुप्ता ने सभी को वसंत पंचमी एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में अकादमिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की।
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