नयी दिल्ली , अक्टूबर 21 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समाज और पुलिस को एक दूसरे पर निर्भर बताते हुए शांति और प्रगति के लिए इनके बीच साझेदारी में संतुलन पर बल दिया है और कहा है कि जहां पुलिस को संरक्षक की भूमिका निभानी चाहिए वहीं समाज को उत्तरदायी नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए ताकि सुरक्षा व्यवस्था और मुस्तैद हो सके।
उन्होंने कहा कि सशक्त राष्ट्र के लिए सशक्त समाज के साथ साथ सशक्त पुलिस भी बहुत अधिक जरूरी है।
श्री सिंह ने पुलिस स्मृति दिवस पर मंगलवार को यहां राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम मेंकृतज्ञ राष्ट्र की ओर से शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किये और भव्य परेड की सलामी ली। उन्होंने कहा , " पुलिस स्मृति दिवस देश की सुरक्षा में अपने आप को समर्पित कर देने वाले हमारे पुलिस, और सभी अर्दद्धसैनिक बलों के जवानों के त्याग को याद करने का दिन है। मैं भारत के नागरिकों की सुरक्षा में, अपने प्राणों को आहूत कर देने वाले सुरक्षा बलों को, श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।"पुलिस और समाज के बीच परस्पर समझ और जिम्मेदारी की भावना पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इससे सुरक्षा और न्याय तथा विश्वास की भावना दृढ होती है। उन्होंने कहा , " समाज और पुलिस, ये दोनों एक-दूसरे पर समान रूप से निर्भर हैं। कोई भी समाज तभी शांति और प्रगति की ओर बढ़ सकता है, जब उसके भीतर सुरक्षा, न्याय और विश्वास की भावना सुदृढ़ हो। पुलिस व्यवस्था तभी प्रभावी रूप से काम कर सकती है, जब समाज के नागरिक पुलिस के सहयोगी के रूप में काम करते हैं, और कानून का सम्मान करते हैं। जब समाज और पुलिस के बीच संबंध परस्पर समझ और जिम्मेदारी पर आधारित होते हैं, तब समाज, और पुलिस बल, दोनों समृद्ध होते हैं।"पुलिस और समाज के बीच साझेदारी में संतुलन पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि प्रभावी पुलिस व्यवस्था के लिए यह जरूरी है। उन्होंने कहा , " इसलिए यह बहुत जरूरी है, कि दोनों के बीच एक संतुलित साझेदारी बनी रहे, जहाँ पुलिस संरक्षक की भूमिका निभाए, और समाज उत्तरदायी नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाए, ताकि सुरक्षा व्यवस्था और मुस्तैद हो सके। "रक्षा मंत्री ने सेना और पुलिस को देश की सुरक्षा के मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि इनका साझा मिशन देश की रक्षा करना है। उन्होंने कहा," सेना हो या पुलिस, ये दोनों ही देश की सुरक्षा के अलग-अलग स्तंभ हैं।
अगर सेना, देश की रक्षा करती है, तो पुलिस समाज की रक्षा करती है। सेना भारत की भौगोलिक अखंडता की रक्षा करती है, तो पुलिस भारत की सामाजिक अखंडता की रक्षा करती है। इसलिए मेरा ऐसा मानना है, कि दुश्मन कोई भी हो, चाहे सीमा पार से आए, या हमारे बीच छिपा हो, जो भी व्यक्ति भारत की सुरक्षा के लिए खड़ा है, वह एक ही आत्मा का प्रतिनिधि है। सेना और पुलिस में बस मंच अलग है, लेकिन इनका मिशन एक ही है, राष्ट्र की रक्षा।"श्री सिंह ने पुलिस की चुनौतियों और उसकी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा , " आज पुलिस को सिर्फ़ अपराध से नहीं, बल्कि धारणा से भी लड़ना पड़ रहा है। एक तरफ अपराध रोकना कानून की मांग है, वहीं दूसरी तरफ समाज में विश्वास बनाए रखना एक नैतिक कर्तव्य है। यह बड़ी अच्छी बात है, कि हमारी पुलिस अपनी अधिकारिक ड्यूटी के साथ-साथ अपना नैतिक कर्तव्य भी बहुत अच्छे से निभा रही है।
अगर लोग रात को चैन से सो पाते हैं, तो इसलिए कि उन्हें विश्वास होता है कि सीमा पर सेना है, और गली-मोहल्ले में पुलिस मुस्तैद है। यह विश्वास ही सुरक्षा की सबसे बड़ी परिभाषा है।"नक्सलवाद की समस्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आगामी मार्च तक यह समस्या इतिहास बन जायेगी और सुरक्षाकर्मियोंं की यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कभी आतंक के लिए जाने जाने वाले क्षेत्रों में अब विकास हो रहा है। उन्होंने कहा, " पिछले कई वर्षों के हमारे सम्मिलित प्रयास, फलीभूत हो रहे हैं। पूरे देश को अब यह भरोसा हो गया है, कि अगले वर्ष तक इस समस्या का नामोनिशान नहीं रहेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ, कि इस वर्ष भी कई शीर्ष नक्सलियों का खात्मा किया जा चुका है। नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या भी अब बहुत कम बची रह गई है, और वह भी अगले वर्ष मार्च तक खत्म हो जाएगीजो क्षेत्र पहले नक्सलियों के आतंक से काँपते थे, आज वहां सड़क , अस्पताल, स्कूल और कॉलेज पहुंच चुके हैं। जो क्षेत्र कभी नक्सल हब हुआ करते थे, आज वो शिक्षा के गढ बन रहे है।"उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में बच्चे मोबाइल चला रहे हैं, कंप्यूटर चला रहे हैं, बड़े सपने देख रहे हैं। भारत के जो क्षेत्र 'रेड कॉरिडोर' के नाम से कुख्यात थे, वह अब 'ग्रोथ कॉरिडोर' में बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जो इतने परिवर्तन कर पाई है, इसमें बहुत बड़ा योगदान हमारे पुलिस बलों का और सुरक्षा बलों का है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने सिर्फ देश की सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा में लगे हुए अपने पुलिस बलों पर भी ध्यान दिया है। सरकार ने, पुलिस के साथियों की स्मृति को जीवंत रखने के लिए, उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए, 2018 में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक की भी स्थापना की। इसके अलावा पुलिस को अत्याधुनिक हथियारों के साथ-साथ बेहतर सुविधाएं भी दी गयी हैं। पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए राज्यों को भी पर्याप्त संसाधन दिए जा रहे हैं।
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