बीजापुर , नवंबर 12 -- छत्तीसगढ के बीजपुर जिले में अवैध रेत परिवहन, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भूमि की अवैध खरीदी-बिक्री और आदिवासी छात्रावासों की दयनीय स्थिति जैसे गंभीर जनहित मुद्दों को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने बुधवार को उप जिलाधिकारी जागेश्वर कौशल को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो संगठन जिलेभर में व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगा।

ज्ञापन में समाज ने आरोप लगाया कि बीजापुर जैसे अति पिछड़े और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बड़े औद्योगिक घराने संरक्षित जनजातीय भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त में संलिप्त हैं। यह कार्य संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम का खुला उल्लंघन है। समाज का कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल आदिवासी हितों के विपरीत है, बल्कि स्थानीय समुदायों को विस्थापन की ओर धकेल रही है।

सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने कहा कि जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) का उपयोग मात्र 25 किमी परिधि तक सीमित रखने से जिले के सुदूर अंचलों के गांव विकास योजनाओं से वंचित हैं। उन्होंने मांग की कि डीएमएफ निधि का लाभ पूरे जिले में समान रूप से मिले, ताकि ग्रामीण विकास की दिशा में वास्तविक परिवर्तन हो सके।

समाज ने ज्ञापन में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को भी गंभीर मुद्दा बताया। उनका कहना है कि नदियों से निरंतर रेत की चोरी से पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ रहा है, साथ ही पंचायतों की आय घट रही है। समाज ने रेत परिवहन पर सख्त कार्रवाई और पंचायतों को नियंत्रण अधिकार देने की मांग रखी है।

इसी तरह, आश्रम छात्रावासों की खस्ताहाल स्थिति पर भी समाज ने चिंता जताई। भोजन की गुणवत्ता, आवास की मरम्मत और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की गई है।

ज्ञापन में चार प्रमुख बिंदु रखे गए जिसमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की भूमि खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई जाए, डीएमएफ निधि का लाभ पूरे जिले को मिले, अवैध रेत परिवहन पर सख्त कार्रवाई हो, आश्रम-छात्रावासों की मरम्मत और भोजन एवं सुरक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए।

इस अवसर पर जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी के साथ ब्लॉक अध्यक्ष पाण्डुराम तेलाम, शांतनु, श्रवण सैंड्रा सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे। समाज ने कहा कि अब संघर्ष केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि अस्तित्व और सम्मान की रक्षा का है।

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