अलवर , नवम्बर 11 -- राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का बाघ अभयारण्य मे मुख्य द्वार के पास सरिस्का के युवराज नाम से विख्यात एसटी-21 बाघ के क्षेत्र में दूसरे बाघ के आने से दोनों में टकराव की आशंका बन गयी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हालांकि एसटी- 21 का क्षेत्र यही है, लेकिन अभी हाल में ही वयस्क हो चुके अपनी मां से दूर जाकर अपना क्षेत्र बनाने निकला बाघ एसटी- 2304 इसी क्षेत्र में घूम रहा है। इनका अब तक हालांकि आमना-सामना नहीं हुआ है। किसी भी दिन इनका आमना-सामना हुआ तो संघर्ष की स्थिति बन सकती है। क्योंकि दोनों नर बाघ हैं। एक ही क्षेत्र में दो नर बाघ नहीं रह सकते।
वन विभाग के सू्त्रों ने बताया कि एसटी-21 ने 20 महीने का होने के बाद वर्ष 2021 में अपना क्षेत्र बनाया था। वह यहीं घूम रहा है, जो करीब 15 किलोमीटर के दायरे में रहता है, लेकिन नये बाघ के इस क्षेत्र में प्रवेश के बाद सरिस्का वन विभाग का दल उन पर विशेष निगरानी रखे हुए है। दोनों बाघ पर्यटकों को कई बार अपने दर्शन दे चुके हैं।
नर बाघ एसटी- 21 इन दिनों करीब छह वर्ष का है और पूर्ण वयस्क हो चुका है, जो युवराज के नाम से जाना जाता है। यह बाघिन एसटी- 12 का शावक था । एसटी-12 रामपुर क्षेत्र में थी, लेकिन उसके पुत्र ने सरिस्का के द्वार के पास ही अपना क्षेत्र बनाया है।
उधर, एसटी- 2304 नर बाघ करीब ढाई वर्ष का है और यह बाघिन एसटी-17 का बच्चा है। वह अपना क्षेत्र बनाने के लिए निकला है। वह बेखौफ होकर दूसरे बाघ के क्षेत्र में घूम रहा है। एसटी- 21 और एसटी- 2304 बाघ अक्टूबर और नवंबर में भी पर्यटकों को दिखे हैं। इसका मतलब है कि दोनों बाघ इसी क्षेत्र में करीब एक महीने से घूम रहे हैं।
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