जयपुर , फरवरी 18 -- राजस्थान के कृषि मंत्री मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा है कि प्रदेश, भारत में सरसों की पैदावार का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और हमारे किसान ओरोबैंके जैसे कीटों और खरपतवारों से भारी दबाव का सामना करते हैं।
उन्होंने यहां आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही। वह कोर्टेवा एग्रीसाइंस और बीएएसएफ एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस इंडिया के साथ रणनीतिक साझेदारी में सरसों की फसल के लिए नया क्लियरफील्ड प्रोडक्शन सिस्टम लॉन्च समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली सरसों की पैदावार को बढ़ाती और उसमें स्थिरता सुनिश्चित करती है।
बीएएसएफ एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस इंडिया के निदेशक गिरिधर रणुवा ने कहा "यह क्षण हमारे किसानों और भारतीय कृषि के भविष्य के प्रति हमारी वर्षों की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह तकनीक किसानों को खरपतवार नियंत्रण में मदद करती हैं और हमारी महत्वपूर्ण तिलहन फसलों में से एक की पैदावार को सुरक्षित रखती हैं।"कोर्टेवा एग्रीसाइंस के साउथ एशिया अध्यक्ष सुब्रतो गीद ने कहा "क्लियरफील्ड सरसों प्रोडक्शन सिस्टम भारतीय कृषि, खासकर सरसों किसानों के लिए एक अहम् पड़ाव है। क्लियरफील्ड सरसों में कोर्टेवा की विज्ञान आधारित नवाचार एक मजबूत समाधान पेश करती है। यह सरसों की खेती के लिए नया मानक तय करता है और किसानों को बेहतर औजार देकर उनकी सफलता और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाता है।"गौरतलब है कि देश में सरसों की 40 लाख टन से अधिक पैदावार होती है। भारतीय किसान हर साल 80 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में इसकी खेती करते हैं। हालांकि, ओरोबंकी जैसे परजीवी खरपतवार बड़ी चुनौती बने हुए हैं, जो 50 प्रतिशत तक उपज का नुकसान कर सकते हैं। कई बार गंभीर संक्रमण की स्थिति में पूरी फसल भी नष्ट हो सकती है। ऐसे में प्रभावी खरपतवार प्रबंधन न सिर्फ पैदावार बनाए रखने के लिए जरूरी है, बल्कि खाद्य तेलों में भारत की आत्मनिर्भरता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
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