नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- सरकार ने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना के तहत अतिरिक्त कार्बन-सघन क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य अधिसूचित करते हुए 208 और उद्योगों को कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने को कहा है।
सरकार की 13 जनवरी को जारी अधिसूचना पेट्रोलियम रिफाइनरियों, पेट्रोकेमिकल्स, कपड़ा और माध्यमिक एल्युमीनियम को भारतीय कार्बन बाजार के अनुपालन तंत्र के दायरे में लाती है। इस हिसाब से अब इन क्षेत्रों में 208 संस्थाओं को निर्दिष्ट उत्सर्जन तीव्रता में कमी के लक्ष्य को पूरा करने की आवश्यकता होगी। इस व्यवस्था के दायरे में अब भारत के सबसे अधिक उत्सर्जन-गहन उद्योगों में 490 संस्थाएं आती हैं। सरकार ने पहली बार पिछले वर्ष अक्टूबर में एल्युमीनियम, सीमेंट, क्लोर-अल्कली और पल्प एंड पेपर क्षेत्रों के लिए 282 बाध्य संस्थाओं को कवर करते हुए जीईआई लक्ष्य अधिसूचित किया है। इस तंत्र का लक्ष्य कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र व्यापार तंत्र के माध्यम से उत्सर्जन का मूल्य निर्धारण करके भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना या उससे बचना है।
योजना अनुपालन तंत्र और ऑफसेट तंत्र, दो तरीके से संचालित होती है और अनुपालन तंत्र के तहत, उत्सर्जन-प्रधान उद्योगों को बाध्य संस्थाओं के रूप में नामित किया जाता है जिन्हें निर्धारित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्यों को पूरा करना अनिवार्य है। जो बाध्य संस्थाएं अपने लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन करती हैं वे ही कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए पात्र होती हैं। ये संस्थाएं उन बाध्य संस्थाओं के साथ आदान-प्रदान कर सकती हैं, जो अपने लक्ष्यों को पूरा करने में असमर्थ हैं।
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