नयी दिल्ली , मार्च 10 -- सरकार ने सशस्त्र सेनाओं को आधुनिक, एकीकृत और उन्नत प्रौद्योगिकी से लैस कर दुनिया की शीर्षतम सेनाओं की श्रेणाी में लाने की दीर्घकालिक योजना को अमली जामा पहनाने के लिए मंगलवार को 'डिफेन्स फोर्सेस विज़न 2047: भविष्य के लिए तैयार भारतीय सैन्य बल की रूपरेखा' से संबंधित एक व्यापक दस्तावेज़ जारी किया। मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ द्वारा तैयार दस्तावेज में सेनाओं के बीच समन्वय (एकीकरण) बढ़ाने, स्वदेशीकरण को तेज़ करने और आने वाले दशकों में उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए संचालन क्षमताओं को मज़बूत करने का रणनीतिक ढांचा प्रस्तुत किया गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साउथ ब्लाॅक में यह दस्तावेज जारी किया। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह विज़न दस्तावेज़ बदलते भू-राजनीतिक, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा माहौल का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए सशस्त्र सेनाओं में आवश्यक रणनीतिक सुधारों, क्षमता विस्तार और संगठनात्मक बदलावों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
इसमें सेना को एक एकीकृत, बहु-क्षेत्रीय (मल्टी-डोमेन) और चुस्त सैन्य बल में बदलने की परिकल्पना की गई है, जो बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य के बीच दुश्मनों से निपटने, संघर्ष के पूरे दायरे में जवाबी कार्रवाई करने और भारत के बढ़ते रणनीतिक हितों की रक्षा करने में सक्षम हो।
इस विज़न का एक प्रमुख स्तंभ तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण और तालमेल को बढ़ावा देना है, जिससे योजना, संचालन और क्षमता विकास में बेहतर समन्वय हो सके। दस्तावेज़ में भविष्य के युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार, उन्नत तकनीकों और आधुनिक प्रशिक्षण ढांचे के महत्व पर भी ज़ोर दिया गया है, ताकि एक ऐसा सैन्य बल तैयार किया जा सके जो बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल सके।
एक अन्य प्रमुख क्षेत्र 'आत्मनिर्भरता' है, जिसके तहत देश की विशिष्ट सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप स्वदेशी तकनीकों और समाधानों के विकास और उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। घरेलू रक्षा विनिर्माण और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने से परिचालन तैयारी बढ़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय विकास में भी योगदान मिलने की उम्मीद है।
यह विज़न दस्तावेज़ एक संतुलित रोडमैप प्रस्तुत करता है, जिसमें अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक समयसीमाओं के अनुसार प्राथमिकता वाले क्षमता लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। यह संरचित दृष्टिकोण विश्व-स्तरीय रक्षा बल के निर्माण के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताओं के विकास, संस्थागत सुधारों और रणनीतिक साझेदारियों का मार्गदर्शन करेगा।
भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों की जटिलता को ध्यान में रखते हुए, इस दस्तावेज़ में 'पूरे राष्ट्र के दृष्टिकोण' की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य शक्ति को कूटनीतिक, तकनीकी और आर्थिक शक्ति के साथ एकीकृत किया जाएगा।
निरंतर सुधार, नवाचार और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के माध्यम से इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक देश की सेना एक वैश्विक स्तर पर सम्मानित, तकनीकी रूप से उन्नत और युद्ध के लिए पूर्णतः तैयार सैन्य बल के रूप में स्थापित हो, जो एक मजबूत और लचीले विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे।
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