नयी दिल्ली , जनवरी 14 -- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा है कि सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम (यूएनसीसीडी)) सम्मेलन के तहत भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए अरावली ग्रीन वॉल परियोजना शुरू की है।
श्री यादव ने बुधवार को यहां कहा कि इस पहल के तहत, अरावली क्षेत्र में बेकार भूमि की पहचान की गई है। इस काम में 29 अरावली जिलों के प्रभागीय वन अधिकारी शुष्क और अर्ध-शुष्क परिस्थितियों के अनुकूल देशी प्रजातियों के वृक्षारोपण परियोजना को कार्यान्वित कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर बुधवार को एक पोस्ट में कहा "आज दिल्ली में संकला फाउंडेशन द्वारा आयोजित अरावली परिदृश्य के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर संकला फाउंडेशन द्वारा बनायी गयी 'इको-रिस्टोरेशन ऑफ़ द अरावली लैंडस्केप' रिपोर्ट का विमोचन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हम 'अरावली ग्रीन वाल' प्रोजेक्ट पर पूरी संकल्पशक्ति से काम कर रहे हैं। अरावली ग्रीन वॉल परियोजना के तहत क्षेत्र में 64.5 लाख हेक्टेयर बेकार भूमि की पहचान की गई है, जिनमें से गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में 27 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में हरितकरण का कार्य शुरू किया जा चुका है।"उन्होंने कहा कि अरावली की 97 वर्ग किलोमीटर राजस्व भूमि हरियाणा में नौरंगपुर से नूंह तक फैली है और यह बेकार हो चुकी है जिसकी वनीकरण के लिए पहचान की गयी है और बेहतर सुरक्षा प्रबंधन के लिए इसे हरियाणा सरकार ने संरक्षित वन भी घोषित कर दिया है।
श्री यादव ने इसे अरावली की रक्षा और संवर्धन के लिए आजादी के बाद का एक प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेप बताया और कहा कि श्री मोदी के दृष्टिकोण और हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के सक्रिय समर्थन से यह संभव हुआ है। इस क्षेत्र के पारिस्थितिकी और ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अरावली देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला है और इसने हजारों वर्षों से मानव सभ्यता को आश्रय दिया है।
उन्होंने कहा कि अरावली पारिस्थितिकी तंत्र चार बाघ अभयारण्यों और 18 संरक्षित क्षेत्रों द्वारा संरक्षित है और इसके लिए जहां भी संभव हो और आवश्यकता हो वहां अतिरिक्त हरित हस्तक्षेप किए जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने वन्यजीव संरक्षण में वैश्विक नेतृत्व किया है और यही कारण है कि आज दुनिया की सात बड़ी प्रजाति की बिल्लियों में से भारत में पांच प्रजातियां हैं। उनका कहना था कि वैश्विक स्तर पर बाघों की लगभग 70 प्रतिशत आबादी भारत में है और संख्या लगातार बढ़ रही है। उनका कहना था कि पिछले दो से तीन वर्षों में अरावली क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर भूमि का जीर्णोद्धार किया गया है और सरकार पारिस्थितिकी को विकास के केंद्र में रखते हुए इस कार्य को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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