नयी दिल्ली , जनवरी 02 -- सरकार ने नवंबर में घोषित निर्यात संवर्धन मिशन के कार्यान्वयन के तहत शुक्रवार को दो प्रमुख सहायता उपायों को लागू किया जिनका उद्येश्य लघु एवं मध्यम उद्यमों के निर्यात को ब्याज सब्सिडी और कर्ज पर सरकारी गारंटी के माध्यम से व्यापार के लिए कर्ज की उपलब्धता में सुधार करना है।
इनमें पहला प्रोत्साहन सहायता उपाय निर्यात ऋण पर ब्याज सब्सिडी से संबंधित है जिसका उद्येश्य एमएसएमई निर्यातकों के सामने उत्पन्न होने वाली कार्यशील पूंजी संबंधी बाधाओं को दूर करना है। इसके अंतर्गत पात्र ऋणदाता संस्थानों द्वारा दिए गए निर्यात ऋण पर 2.75 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी जो निर्यात से पहले और बाद में रुपये में प्रदान की जाएगी। अधिसूचित या उभरते बाजारों में निर्यात के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान भी किया गया है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार ब्याज सब्सिडी छह अंकों के कोड वाले उत्पादों के लिए है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रत्येक निर्यातक (आईईसी धारक) के लिए वार्षिक सीमा 50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। लागू दरों की समीक्षा हर छह महीने में मार्च और सितंबर में की जाएगी।
आज अधिसूचित दूसरे उपाय के तहत लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) निर्यातकों को सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऋण गारंटी निधि ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई) के साथ साझेदारी में निर्यात ऋण के लिए गारंटी सहायता शुरू की जा रही है। इसके तहत सूक्ष्म एवं लघु निर्यातकों को 85 प्रतिशत तक और मध्यम निर्यातकों को 65 प्रतिशत तक की गारंटी कवरेज प्रदान की जाएगी। इसमें प्रति निर्यातक के लिए एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 10 करोड़ रुपये की गारंटीकृत राशि का प्रावधान है।
निर्यात संवर्धन मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 नवंबर 2025 को मंजूरी प्रदान की थी। इस मिशन के लिए वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 के दौरान कुल 25,060 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
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