नयी दिल्ली , जनवरी 29 -- लोकसभा में गुरुवार को पेश वित्त वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार उचित कौशल विकास, उद्यमशीलता की भावना और सरकार की कई महत्वपूर्ण पहलों से देश में बेरोज़गारी में निरंतर कमी लाने, रोजगार सृजन को बढावा देने और कार्यबल को कल्याणकारी सुरक्षा प्रदान करने में सफलता मिली है।
केन्द्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल के माध्यम से दो करोड़ 30 लाख रोजगार दिये गये। ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से 31 करोड़ से अधिक पंजीकृत असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया। सर्वेक्षण में कहा गया है कि नयी श्रम संहिता श्रमिकों का कल्याण और नियोक्ताओं के लिए व्यापार में सुगमता सुनिश्चित कर रही हैं।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि उद्यमशील गतिविधियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोज़गार बढा है और 12 करोड़ 90 लाख व्यक्ति (जिनमें 28 प्रतिशत महिलाएं हैं) गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र को आकार दे रहे हैं। सर्वेक्षण में एक उपलब्धि के तौर पर कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के बीच गिग श्रमिकों की संख्या में 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सर्वेक्षण के अनुसार श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढ़ावा देने और कौशल विकास को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हाल में की गयी पहलों से गुणवत्तापूर्ण रोजगार और श्रम शक्ति बढाने के प्रति सरकार की नई प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। इसका उद्देश्य जनसांख्यिकीय लाभ का पूरा फायदा उठाना है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि संरचनात्मक सुधारों, करों को युक्तिसंगत बनाने और कौशल विकास पर निरंतर ध्यान दिये जाने से हाल के वर्षों में देश में रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विनियमन में ढील, जीएसटी 2.0 तथा राज्यों द्वारा लागू श्रम सुधारों जैसे उपायों ने उद्योग और सेवा क्षेत्रों में श्रम बल की भागीदारी और रोजगार वृद्धि को बढ़ावा दिया है।
देश में हाल के वर्षों में महिला श्रम बल भागीदारी दर (एफएलएफपीआर) में सकारात्मक रुझान देखा गया है जो 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 41.7 प्रतिशत हो गई है। इसी अवधि में बेरोज़गारी दर 5.6 प्रतिशत से घटकर मात्र 3.2 प्रतिशत रह गई है।
त्रैमासिक और मासिक आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आंकड़े मौसमी उतार-चढ़ाव के साथ एक स्थिर श्रम बाज़ार को दर्शाते हैं। ये संकेत देते हैं कि अप्रैल से सितंबर 2025 (वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही) की अवधि में वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) के तहत बेरोज़गारी दर में गिरावट, श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) में स्थिरता और रोजगार के उच्च स्तर दर्ज किए गए, जो रोजगार परिस्थितियों में सुधार का संकेत है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के कुल 56.2 करोड़ लोग रोजगार में थे जो पहली तिमाही की तुलना में लगभग 8.7 लाख नए रोजगार सृजन को दर्शाता है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित