रायपुर , दिसंबर 30 -- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में हुए घटनाक्रम को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि तमनार के गारे पेलमा सेक्टर-1 में जिंदल पॉवर लिमिटेड को दी गई ओपन कास्ट कोल माइंस की अनुमति गांव, गरीब, किसान और आदिवासी विरोधी नीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस खदान के खिलाफ क्षेत्र के 14 गांवों के ग्रामीण और आदिवासी लंबे समय से विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इससे उनकी खेती, पर्यावरण और पुश्तैनी जमीन पर संकट है।

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि 8 दिसंबर को आयोजित जनसुनवाई पूरी तरह फर्जी थी। प्रशासन ने ग्रामीणों के विरोध को नजरअंदाज कर कंपनी के ठेका कर्मचारियों को एकत्र कर जबरन सहमति दिखाने का प्रयास किया। ग्रामीण 5 दिसंबर से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे, लेकिन प्रशासन और सरकार के किसी प्रतिनिधि ने संवाद करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि 27 दिसंबर को अचानक पुलिस कार्रवाई कर 50-60 आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया गया, लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया गया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि कोयले के परिवहन को शुरू कराने के उद्देश्य से प्रशासन ने दबाव बनाया, जिससे एक ग्रामीण वाहन की चपेट में आकर घायल हो गया। इसी घटना के बाद हालात बिगड़े। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने दिनों तक धरना जारी रहने के बावजूद कलेक्टर और एसपी ने आंदोलनकारियों से बातचीत क्यों नहीं की।

पूर्व मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने कहा कि भाजपा सरकार राज्य के जंगलों और खनिज संसाधनों को निजी कंपनियों के हवाले कर रही है। हसदेव, मैनपाट, खैरागढ़ और बस्तर क्षेत्र के उदाहरण देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभाओं की अनदेखी कर खनन परियोजनाएं थोपी जा रही हैं।

कांग्रेस ने जिंदल को दी गई कोल माइंस औ कीर 8 दिसंबर की जनसुनवाई को रद्द करने, घटना की न्यायिक जांच, आंदोलनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने तथा कलेक्टर-एसपी की जवाबदेही तय करने की मांग की। पत्रकार वार्ता में विधायक इंद्रशाह मंडावी सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

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