भोपाल , फरवरी 23 -- पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक जयवर्द्धन सिंह ने मध्यप्रदेश में शासकीय संपत्ति के कथित नियम विरुद्ध क्रय-विक्रय के मामले को विधानसभा में उठाते हुए करोड़ों रुपए के मुद्रांक एवं पंजीयन शुल्क की वसूली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि शासन की वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।

विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के माध्यम से यह तथ्य सामने आया कि वन भवन की संपत्ति को अन्य शासकीय विभागों को लगभग 56 करोड़ रुपए में विक्रय किया गया। सामान्यतः एक शासकीय विभाग द्वारा दूसरे शासकीय विभाग से संपत्ति के क्रय-विक्रय पर मुद्रांक शुल्क एवं पंजीयन शुल्क में छूट का प्रावधान लागू होता है। इसके बावजूद संबंधित संपत्तियों के पंजीयन में शासकीय विभागों से मुद्रांक शुल्क एवं पंजीयन शुल्क दोनों की वसूली की गई और करोड़ों रुपए के मुद्रांक खरीदे गए। इसे सरकारी धन का अनावश्यक और नियम विरुद्ध व्यय बताया गया है।

मामला उजागर होने के बाद मंत्री परिषद के निर्णय के पश्चात संबंधित रजिस्ट्रियां निरस्त कर दी गईं। हालांकि यह प्रश्न बना हुआ है कि जिन विभागों द्वारा मुद्रांक शुल्क और पंजीयन शुल्क के रूप में करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया, वह राशि एक निजी सेवा प्रदाता के माध्यम से अदा की गई, जिसे वित्तीय अनियमितता से जोड़कर देखा जा रहा है।

मामले में संबंधित उप पंजीयक द्वारा इतनी बड़ी प्रक्रिया में रजिस्ट्री संपादित किए जाने, वन विभाग के एक अधिकारी द्वारा विभाग के नाम के स्थान पर स्वयं के नाम से रजिस्ट्री कराए जाने तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

यह भी आरोप है कि संपत्ति के इस क्रय-विक्रय में वस्तु एवं सेवा कर सहित अन्य करों का समुचित भुगतान नहीं किया गया, जिससे कर नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई गई है।

जयवर्द्धन सिंह ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराए जाने, दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने तथा सरकारी धन के दुरुपयोग की भरपाई सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि पारदर्शी जांच नहीं होती है तो यह शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।

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