पटना , फरवरी 12 -- बिहार के उप मुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गुरूवार को कहा कि सरकारी भूमि राज्य की अमूल्य संपत्ति है और इस पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे की स्थति में उचित कार्रवाई की जाएगी।

श्री सिन्हा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार सभी जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज ऐसी सरकारी भूमि, जिनका विधिसम्मत बंदोबस्ती नहीं हुआ है, उन्हें विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए प्राथमिकता के आधार पर मुक्त कराया जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की चूक या लापरवाही की वजह से राज्य के हित प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रशासन शून्य सहिष्णुता की नीति के साथ कार्रवाई करेगा।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विभाग की प्राथमिकता है कि अंचलवार सरकारी भूमि को सुरक्षित कर लैंड बैंक का निर्माण किया जाए, जिससे राज्य में औद्योगीकरण, आधारभूत संरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। यह अभियान केवल भूमि मुक्त कराने का नहीं, बल्कि राज्य के विकास की आधारशिला मजबूत करने का प्रयास है।

राज्य में सरकारी भूमि के संरक्षण और सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक सख्ती और तेज हो गई है। बिहार के मुख्य सचिव के पूर्व निर्देश तथा हाल ही में उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि कैडेस्ट्रल सर्वे में दर्ज सरकारी भूमि, जिस पर विधिसम्मत बंदोबस्ती नहीं हुई है और जो निजी व्यक्तियों के कब्जे में है, उसे प्राथमिकता के आधार पर विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए मुक्त कराया जाए।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने भी इस संबंध में निर्देश जारी कर कहा गया है कि ऐसी सभी सरकारी भूमि की पहचान कर विधिसम्मत कार्रवाई के तहत वाद दायर किए जाएं तथा भूमि की रिकवरी सुनिश्चित की जाए। सभी जिला प्रशासन को यह भी निर्देशित किया गया है कि इस कार्य को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए नियमित निगरानी की जाए।

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