लखनऊ , नवंबर 10 -- इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक आदेश में कहा कि सरकारी कर्मचारी के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों का सत्यापन और तकनीकी परीक्षण एक ही अफसर से करायें।

अदालत ने कहा कि बिलों का सत्यापन और परीक्षण या तो सरकारी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक या फिर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से करायें, दोनों से नहीं। इस आदेश से सरकारी कर्मचारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों के भुगतान में राहत मिलेगी।

न्यायाधीश मनीष माथुर की एकल पीठ ने यह आदेश कर एवं निबंधन विभाग के लखनऊ निवासी सेवानिवृत्त कर्मचारी श्याम शंकर मिश्र की याचिका पर दिया। याचिका में याची के चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों को चिकित्सा अधीक्षक के सत्यापन के बाद सी एम ओ से भी सत्यापित करवाए जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी।

याची के अधिवक्ता अभिषेक मिश्र का कहना था कि चिकित्सा अधीक्षक द्वारा बिलों के सत्यापन और तकनीकी परीक्षण के बाद इन्हें सी एम को सत्यापन के लिए भेजा जाना कानूनी प्रावधानों के खिलाफ है। उधर, सरकारी वकील ने कहा कि बिलों को आगे सत्यापन के लिए परंपरा के तहत सीएमओ को भेजा गया था।

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