नयी दिल्ली , मई 07 -- केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा है कि वर्ष 2020 के बाद देश के समुद्री क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी 340 प्रतिशत बढ़ी है और यह उल्लेखनीय वृद्धि उनकी सरकार की समावेशी, भविष्योन्मुखी समुद्री कार्यबल तैयार करने की नीति का परिणाम है।
श्री सोनोवाल ने बुधवार को यहां 10वें इंडियन ओशन डायलॉग को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस दौरान मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल तथा यमन के राज्यमंत्री वलीद मोहम्मद अल-कादिमी भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि 'सागर में सम्मान' जैसी पहलों के माध्यम से समुद्री क्षेत्र में महिलाओं के लिए सम्मान, समावेशन और नेतृत्व के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समुद्री क्षेत्र में हो रहा यह बदलाव भारतीय महासागर क्षेत्र के लिए अधिक समावेशी, सशक्त और भविष्य के अनुरूप कार्यबल तैयार करने में सहायक बन रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय महासागर केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और आपूर्ति श्रृंखलाओं की जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि इसके महत्व को देखते हुए क्षेत्रीय सहयोग, लचीलापन और समावेशिता को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री नीतियां 'सागर' और 'महासागर' जैसी पहलों के अनुरूप हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और समान विकास सुनिश्चित करना है। उनका कहना था कि भारत मानवीय सहायता, समुद्री निगरानी और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' की भूमिका निभा रहा है।
भारतीय महासागर रिम संघ (आईओआरए) की अध्यक्षता कर रहे भारत द्वारा आयोजित इस संवाद का विषय 'परिवर्तनशील विश्व में भारतीय महासागर क्षेत्र' रखा गया है। दो दिवसीय इस सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकॉनमी, आपदा जोखिम प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है।
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