भुवनेश्वर , दिसंबर 10 -- ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने बुधवार को मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक कार्रवाई की अपील की और कहा कि ये अधिकार केवल कानूनों से ही मजबूत नहीं होते, बल्कि नागरिकों, संस्थाओं और समुदायों की सक्रिय भागीदारी से मजबूत होते हैं।

संबलपुर में ओडिशा मानवाधिकार आयोग की ओर से आयोजित विश्व मानवाधिकार दिवस 2025 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा , "यह दिन हमें याद दिलाता है कि न्याय सभी तक पहुंचना चाहिए, भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना होगा और हर व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। इस वर्ष की थीम "मानवाधिकार : हमारी रोजमर्रा की जरूरतें" यह रेखांकित करती है कि शिक्षा तक पहुंच, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सुरक्षित कार्यस्थल, भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा-ये सभी मानवीय गरिमा की नींव हैं।"राज्यपाल ने कहा कि जब इन अधिकारों की रक्षा होती है, तो समाज समृद्ध होता है; जब इनसे वंचित किया जाता है, तो समाज की आत्मा क्षीण हो जाती है। वर्ष 1948 में सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणापत्र (यूडीएचआर) अपनाए जाने की याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह मानव सभ्यता में एक ऐतिहासिक बदलाव था, जिसने सभी के लिए गरिमा, स्वतंत्रता, समानता और न्याय की पुष्टि की।

श्री कंभमपति ने संयुक्त राष्ट्र की प्रशंसा की कि उसने अंतरराष्ट्रीय संधियों, सम्मेलनों और मानवाधिकार परिषद तथा सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा जैसे तंत्रों के माध्यम से मजबूत वैश्विक मानवाधिकार ढांचा स्थापित किया है। भारत के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने यूडीएचआर के मसौदे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, रंगभेद के खिलाफ शुरुआती आवाज उठाई और आज भी संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में नेतृत्व कर रहा है, जिसमें सर्व-महिला इकाइयों की तैनाती भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा, आवास, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षित पेयजल और दिव्यांगजनों के लिए सुगमता सुनिश्चित करने वाली योजनाओं के माध्यम से मानवाधिकारों को मजबूत किया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और सुगम्य भारत अभियान जैसी योजनाओं ने लाखों लोगों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है।

राज्यपाल ने न्यायमूर्ति शत्रुघ्न पुजारी के नेतृत्व वाले ओडिशा मानवाधिकार आयोग की प्रशंसा की तथा शिकायतों के त्वरित निवारण पर कमजोर समुदायों की रक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को सराहा। उन्होंने राज्य सरकार के खाद्य सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, महिला सशक्तीकरण और आदिवासी कल्याण के प्रयासों की भी सराहना की।

न्यायमूर्ति शत्रुघ्न पुजारी, मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं रमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता बेजवाड़ा विल्सन और पूर्व डीजीपी तथा ओपीएससीएस के अध्यक्ष सत्यजीत मोहंती ने भी समारोह को संबोधित किया।

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