लखनऊ , जनवरी 11 -- मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां मिलने की शिकायतें सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाया है।
समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के दस्तावेजों की भी समीक्षा कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग को आदेश दिया गया है कि अगले तीन महीनों के भीतर सभी मौजूदा आउटसोर्सिंग कर्मियों के डॉक्यूमेंट्स की जांच पूरी कर ली जाए, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
साथ ही समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों को पारदर्शी और नियमबद्ध बनाने के लिए स्पष्ट शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए हैं।
रविवार को राज्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के लिए आउटसोर्सिंग नियुक्तियों की प्रक्रिया को पूरी तरह मानकों के अनुसार तय किया जाएगा। शासनादेश के जरिए यह सुनिश्चित होगा कि विभाग में आउटसोर्सिंग से होने वाली हर नियुक्ति निर्धारित नियमों, प्रक्रिया और पात्रता के अनुरूप ही की जाए।
असीम अरुण ने निर्देश दिया है कि शासनादेश में यह स्पष्ट कर दिया जाए कि आउटसोर्सिंग से नियुक्त किए जाने वाले सभी कार्मिकों के शैक्षिक प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों की पूर्ण जांच अनिवार्य होगी। साथ ही प्रत्येक कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन भी कराया जाएगा, ताकि किसी फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे।
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