मंगलुरु , नवंबर 19 -- कन्नड़ विकास प्राधिकरण (केडीए) में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब उसके प्रमुख पुरुषोत्तम बिलिमाले ने यह टिप्पणी कर दी कि कई यक्षगान कलाकार समलैंगिक हैं। मैसूर में एक पुस्तक के विमोचन समारोह के दौरान की गई उनकी इस टिप्पणी से पूरे कर्नाटक में व्यापक रोष फैल गया।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा ने श्री बिलिमाले के बयान की निंदा की और इसे अपमानजनक बताया। श्री विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया और मांग की कि उन्हें तुरंत पद से हटा दिया जाना चाहिए।
श्री विजयेंद्र ने कहा कि यह टिप्पणी कांग्रेस पार्टी की मानसिकता को दर्शाती है, क्योंकि यह टिप्पणी न केवल कलाकारों का अपमान करती है, बल्कि तटीय क्षेत्र और व्यापक हिंदू समुदाय का भी अपमान करती है।
श्री बिलिमाले ने अपनी टिप्पणी में यह तर्क दिया था कि यक्षगान मंडलियों की जीवनशैली ऐसी होती है कि वे अक्सर छह से आठ महीनों तक यात्रा करते हैं। इससे ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं कि पुरुष कलाकार महिलाओं की भूमिकाएं निभाते हैं और उनमें समलैंगिक आकर्षण उत्पन्न हो जाता है।
श्री बिलिमाले ने यह भी दावा किया कि कई बार कलाकारों पर मंडली के नेताओं का दबाव भी होता है और इन नेताओं की पहल को नकारने का परिणाम मंच पर बदले की कार्रवाई के रूप में सामने आ सकता है, जिसका नकारात्मक प्रभाव उनकी आजीविका पर पड़ सकता है।
यक्षगार कर्नाटक की पारंपरिक नृत्य-नाट्यकला का एक रूप है, जिसे अपनी खास वेशभूषा, संगीत और हिंदू महाकाव्यों के मंचन के लिए जाना जाता है।
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